भरत तिवारी कोई खूंखार अपराधी नहीं था। पुलिस रिकॉर्ड में उसके ऊपर कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं है। गांव वाले बताते हैं कि वो लोगों की मदद करता था। सामाजिक कामों में आगे रहता था।
पिछले साल जब जवनिया गांव में बाढ़ आई थी और गंगा नदी के कटाव के कारण करीब 600 घर नदी में समा गए थे, तो भरत तिवारी ही था जो एसडीएम से जाकर मिला था। सरकार और प्रशासन से गांव के रिडेवलपमेंट की मांग की थी।
लेकिन आरोप है कि सरकार और प्रशासन ने गांव वालों को और भरत को सिर्फ दिलासा दिया। जमीन पर कोई काम नहीं हुआ, और जो हुआ वो बहुत घटिया, इसी बात को लेकर भरत मानसिक तनाव में चल रहा था। वो लगातार सरकार और प्रशासन पर सवाल उठा रहा था। दबाव बना रहा था।
फेसबुक पर गुस्सा और पुलिस की एंट्री
भरत तिवारी ने सोशल मीडिया पर सरकारी कामकाज के खिलाफ गुस्सा जाहिर किया, इसके बाद पुलिस उसके घर पहुंची। आरोप है कि भरत ने अवैध पिस्टल निकालकर हवाई फायरिंग की और पुलिस को चुनौती देने लगा, इस घटना से एक दिन पहले पुलिस ने आधिकारिक बयान जारी किया। पुलिस ने भरत तिवारी को ‘मानसिक रूप से अस्वस्थ’ बताया।
एनकाउंटर वाले दिन क्या हुआ?
एक दिन पहले भरत ने बंदूक की नोक पर एसएचओ को अपने घर में बिठा लिया था। वीडियो में वो एसएचओ से आराम से बात करता दिख रहा है, अगले दिन पुलिस फिर दल-बल के साथ पहुंचती है। सबसे पहले भरत के साथ लंबी बातचीत चलती है। इस दौरान भरत फेसबुक लाइव भी करता है, लाइव में वो अपनी सारी समस्या बताता है। ये भी बताता है कि पुलिस उसे पकड़ने क्यों आई है, वीडियो में दिखता है कि बातचीत के दौरान वो अपना पिस्टल पुलिस की तरफ फेंक देता है। हैंडओवर कर देता है। यानी सरेंडर कर देता है, परिजनों का आरोप है कि सरेंडर करने के बाद भी पुलिस ने भरत को 5 गोलियां मारीं। अस्पताल ले जाने के दौरान पीएमसीएच में उसकी मौत हो गई।
पुलिस का क्या दावा है?
वहीं पुलिस का दावा अलग है। पुलिस का कहना है कि भरत लगातार फायरिंग कर रहा था। आत्मरक्षा में पुलिस ने उसके पैर में गोली मारी थी। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
एनकाउंटर पर 5 बड़े सवाल
1. जब भरत तिवारी ने फेसबुक लाइव में पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया, पिस्टल फेंक दी, तो पुलिस ने उसको गोली क्यों मारी?
2. जब उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, वो माफिया नहीं है, डॉन नहीं है, कोई खूंखार अपराधी नहीं है… तो एनकाउंटर क्यों किया गया?
3. जब भरत से पुलिस को कोई खतरा नहीं था, वो निहत्था हो चुका था, तो उस पर 5 गोलियां क्यों चलाई गईं?
4. पुलिस ने क्या किसी के दबाव में आकर एनकाउंटर किया?
5. भरत क्यों मुख्यमंत्री की बात कर रहा था? क्या वो कोई बड़ा राज जानता था जिसका नाम वो ले नहीं पाया?
प्रशासनिक व्यवस्था से नाराजगी
भरत तिवारी इलाके में सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर सक्रिय था। उसके गाँव जवनिया का हिस्सा गंगा नदी के कटाव और बाढ़ के कारण संकट में था। नेताओं और अधिकारियों द्वारा किए गए वादों के पूरा न होने के कारण वो सिस्टम से काफी तंग आ चुका था। परिवार का कहना है कि वो गहरे मानसिक तनाव में था।
पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई
इस घटना की गंभीरता और प्राथमिक जांच के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की है। शाहपुर थाना के थानाध्यक्ष यानी एसएचओ, दरोगा, एएसआई और सिपाहियों सहित एनकाउंटर में शामिल 4 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। मामले की उच्च स्तरीय जांच चल रही है। तो सवाल ये है कि अगर भरत मानसिक रूप से अस्वस्थ था, जैसा पुलिस ने एक दिन पहले कहा… तो उसका इलाज कराने की बजाय एनकाउंटर क्यों? और अगर वो सरेंडर कर चुका था, जैसा वीडियो में दिख रहा है… तो गोली चलाने की नौबत क्यों आई? जांच के बाद ही साफ होगा कि ये आत्मरक्षा थी या कुछ और। फिलहाल पुलिस वाले सस्पेंड हैं और भरत तिवारी के परिवार के पास सिर्फ सवाल बचे हैं।
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