साल 2024… जाधवपुर लोकसभा सीट के नतीजे आ रहे थे। टीएमसी के दफ्तर में जश्न का माहौल था। ममता बनर्जी की पार्टी ने एक बार फिर बंगाल में शानदार प्रदर्शन किया था और जाधवपुर से जीतकर संसद पहुंची थीं पार्टी की युवा और तेजतर्रार नेता सायोनी घोष। टीवी चैनलों पर उनकी तस्वीरें चल रही थीं। टीएमसी कार्यकर्ता मिठाइयां बांट रहे थे। ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के भरोसेमंद चेहरों में सायोनी घोष का नाम सबसे ऊपर गिना जा रहा था। लेकिन राजनीति में वक्त बदलते देर नहीं लगती। जिस नेता को कभी टीएमसी का भविष्य कहा गया… जो पार्टी की युवा ब्रिगेड का सबसे चमकदार चेहरा बनी… जो ममता बनर्जी की सबसे करीबी नेताओं में शामिल थी… आज वही सायोनी घोष टीएमसी छोड़ने और 20 बागी सांसदों के साथ नई राजनीतिक राह पर निकलने की वजह से सुर्खियों में हैं।
आखिर ऐसा क्या हुआ कि आज उनका नाम टीएमसी के खिलाफ सबसे बड़ी बगावत से जोड़ा जा रहा है? आइए समझते हैं द ट्रुथ 24 की इस खास रिपोर्ट में…
फिल्मों से शुरू हुआ सफर
सायोनी घोष का जन्म कोलकाता में हुआ। बचपन से ही अभिनय में रुचि थी। उन्होंने बंगाली टीवी और फिल्म इंडस्ट्री में काम करना शुरू किया। धीरे-धीरे उनकी पहचान एक प्रतिभाशाली अभिनेत्री के रूप में बनने लगी। कई लोकप्रिय टीवी शो और फिल्मों में उन्होंने काम किया। बंगाल के घर-घर में लोग उन्हें पहचानने लगे। लेकिन सायोनी सिर्फ अभिनय तक सीमित रहने वाली नहीं थीं।उनका इंट्रस्ट सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों में भी बढ़ता जा रहा था। यहीं से उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया।
ममता बनर्जी से बढ़ी नजदीकी
साल 2021 का विधानसभा चुनाव। बीजेपी और टीएमसी के बीच सीधी लड़ाई। पूरा देश बंगाल की राजनीति पर नजर रखे हुए था। इसी दौरान सायोनी घोष खुलकर ममता बनर्जी के समर्थन में सामने आईं, उनके भाषण वायरल होने लगे, उनकी आक्रामक शैली ने पार्टी नेतृत्व का ध्यान खींचा। ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने उन्हें तेजी से आगे बढ़ाया। कुछ ही समय में सायोनी टीएमसी के सबसे चर्चित युवा चेहरों में शामिल हो गईं।
त्रिपुरा में गिरफ्तारी और राष्ट्रीय पहचान
सायोनी घोष का नाम पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर तब चर्चा में आया जब वह त्रिपुरा में पार्टी अभियान के दौरान विवादों में घिर गईं।
उन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया। टीएमसी ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया। बीजेपी ने इसे कानून-व्यवस्था का मामला बताया। लेकिन इस पूरे विवाद का फायदा सायोनी को मिला। उनकी पहचान बंगाल से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गई।
हार के बाद भी बढ़ता गया कद
सायोनी घोष ने चुनाव भी लड़ा। हार भी देखी, लेकिन राजनीति में कई बार हार भी नेता को बड़ा बना देती है। टीएमसी नेतृत्व ने उन पर भरोसा बनाए रखा। उन्हें युवा संगठन की जिम्मेदारी सौंपी गई, पार्टी के बड़े मंचों पर जगह मिली, यानी सायोनी लगातार ऊपर बढ़ती रहीं।
जाधवपुर से संसद तक
फिर आया 2024 का लोकसभा चुनाव। टीएमसी ने उन्हें जाधवपुर जैसी महत्वपूर्ण सीट से उम्मीदवार बनाया।यह सिर्फ चुनाव नहीं था, यह ममता बनर्जी का उन पर भरोसा था। सायोनी घोष चुनाव जीतीं। पहली बार सांसद बनीं। संसद पहुंचीं।उनके भाषणों की चर्चा होने लगी और देखते ही देखते वह टीएमसी की राष्ट्रीय पहचान वाले चेहरों में शामिल हो गईं।
फिर क्या हुआ?
लेकिन राजनीति में सबसे बड़े संकट बाहर से नहीं आते। सबसे बड़ा संकट अंदर से आता है, दावा किया जा रहा है कि टीएमसी के भीतर लंबे समय से असंतोष बढ़ रहा था, कई सांसद और नेता पार्टी नेतृत्व के कुछ फैसलों से नाराज बताए जा रहे थे और इसी बीच सायोनी घोष का नाम अचानक उन नेताओं में शामिल होने लगा जो पार्टी लाइन से अलग सोच रहे थे। राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हुई। बैठकें हुईं। कयास लगे और फिर दावा सामने आया कि सायोनी घोष टीएमसी छोड़ चुकी हैं।
20 सांसदों के साथ नई सियासत?
सबसे बड़ा दावा यह है कि सायोनी घोष अकेली नहीं गईं, कहा जा रहा है कि उनके साथ करीब 20 सांसदों का एक समूह भी टीएमसी से अलग हुआ है और इन नेताओं ने त्रिपुरा की NCPI का दामन थाम लिया है, तो यह सिर्फ दल बदल नहीं होगा, यह ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक झटका है, क्योंकि सायोनी कोई साधारण नेता नहीं हैं, वह युवा चेहरा हैं, सांसद हैं और टीएमसी के भविष्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली नेता मानी जाती थीं। बंगाल की राजनीति में इससे पहले भी बड़े नेता टीएमसी छोड़ चुके हैं।
शुभेंदु अधिकारी इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं, लेकिन सायोनी घोष का मामला अलग है, क्योंकि वह पार्टी की नई पीढ़ी का चेहरा थीं।
अगर वह वास्तव में अलग राजनीतिक धारा तैयार करती हैं तो इसका असर सिर्फ संसद तक सीमित नहीं रहेगा, इसका असर 2029 के लोकसभा चुनाव में भी देखने को मिलेगा। जिस नेता को ममता बनर्जी ने राजनीति में पहचान दी, जिसे पार्टी ने सांसद बनाया, क्या वही नेता अब टीएमसी के खिलाफ सबसे बड़ी राजनीतिक लड़ाई लड़ने जा रही है? इन सवालों का जवाब आने वाला वक्त देगा, लेकिन इतना तय है कि फिल्मों से संसद तक का सफर तय करने वाली सायोनी घोष अब बंगाल की राजनीति के सबसे चर्चित नामों में शामिल हो चुकी हैं, क्योंकि राजनीति में असली तूफान विपक्ष नहीं लाता… कई बार तूफान उसी घर से उठता है जिसे कभी आपने खुद बनाया होता है।
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