us iran ceasefire deal: ये खबर ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज’ को बंद करने के ईरानी सेना के ऐलान और उस पर अमेरिका के इनकार के बाद पैदा हुए वैश्विक सस्पेंस और तनाव की पूरी जानकारी देता है.

us iran ceasefire deal: दुनिया के सबसे जरूरी समुद्री रास्तों में से एक ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज’ को लेकर इस समय भारी सस्पेंस बना हुआ है. ईरान की संयुक्त मिलिट्री कमांड ने अचानक ऐलान कर दिया है कि वे इस रास्ते से जहाजों का आना जाना बंद कर रहे हैं. ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने युद्ध खत्म करने के समझौते (MoU) का उल्लंघन किया है. उनका कहना है कि इजरायल लगातार युद्धविराम तोड़ रहा है और दक्षिणी लेबनान से सेना भी नहीं हटाई गई है. ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि यह तो सिर्फ पहला कदम है, अगर उनकी बात नहीं मानी गई तो वे आगे और भी कड़े फैसले ले सकते हैं.
दिलचस्प बात यह है कि इसी हफ्ते अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ा समझौता हुआ था. इस समझौते के बाद ही स्ट्रैट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने का फैसला लिया गया था. लेकिन अब ईरान के इस नए ऐलान ने सबको चौंका दिया है. दूसरी तरफ अमेरिका इस दावे को मानने से इनकार कर रहा है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने फॉक्स न्यूज से बातचीत में कहा कि उन्हें पूरा भरोसा है कि ईरान और अमेरिका के बीच हुआ 14 सूत्रीय समझौता कायम रहेगा. उन्होंने साफ कहा कि अमेरिका को अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे लगे कि यह समुद्री रास्ता बंद हुआ है.
इस पूरे विवाद के बीच शनिवार को एक दुखद घटना भी सामने आई है. अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर समझौते की खबर आने के कुछ ही घंटों बाद इजरायल ने दक्षिणी लेबनान पर हमला कर दिया. इस हमले में कम से कम सात लोगों की जान चली गई, जिनमें दो मासूम बच्चे भी शामिल थे. इस हमले के बाद माहौल और ज्यादा बिगड़ गया है. ईरान ने दोबारा प्रतिबंध लगाने की बात कहकर साफ कर दिया है कि इस नए हमले से दोनों देशों के बीच हुई बड़ी डील अब खतरे में पड़ गई है.
हालात को संभालने और बातचीत का रास्ता खुला रखने के लिए पाकिस्तान भी इस मामले में एक्टिव हो गया है. पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी शनिवार को अचानक ईरान की राजधानी तेहरान पहुंच गए हैं. वहां उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से खास मुलाकात की है. माना जा रहा है कि नकवी इस पूरी बातचीत पर करीबी नजर रख रहे हैं ताकि दोनों देशों के बीच का यह समझौता पूरी तरह टूट न जाए. इससे पहले भी वह अमेरिका और ईरान के मतभेदों को दूर करने के लिए तीन बार ईरान की यात्रा कर चुके हैं.
इस पूरे मामले पर ईरान ने अपना रुख बिल्कुल साफ रखा है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का कहना है कि उन्होंने समझौते के तहत अपने सारे वादे पूरे किए हैं. अब यह अमेरिका की जिम्मेदारी है कि वह इजरायल पर दबाव बनाए और लेबनान पर हो रहे हमलों को रुकवाए. उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर दूसरी तरफ से वादों को पूरा नहीं किया गया, तो यह समझौता टिक नहीं पाएगा. ईरान अब स्विट्जरलैंड में अमेरिका से इस बात का जवाब मांगेगा कि वे अपने वादों को कैसे और कब तक लागू करने वाले हैं.
