Barabanki news: लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर वाली इमारत में लगी भीषण आग ने न केवल एक भवन को राख किया, बल्कि बाराबंकी के लखपेड़ाबाग निवासी मंसूर आलम के परिवार की खुशियों को भी हमेशा के लिए छीन लिया. इस अग्निकांड में 24 वर्षीय मोहम्मद अम्मार की दर्दनाक मौत हो गई. अम्मार की मौत की खबर ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है और हर किसी की आंखे नम हैं.
ग्राफिक डिजाइनर के रूप में काम करते था अम्मार
लखपेड़ाबाग के रहने वाले मंसूर आलम के बड़े बेटे मोहम्मद अम्मार लखनऊ में एक ग्राफिक डिजाइनर के रूप में काम करते थे. आग लगने के समय वह उसी इमारत में मौजूद थे. भीषण लपटों के बीच घिरे अम्मार गंभीर रूप से झुलस गए और इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया. परिवार के लिए यह सदमा असहनीय है, क्योंकि अम्मार न केवल एक बेटा था, बल्कि पूरे परिवार की उम्मीद और आर्थिक सहारा भी था.
शादी के सपने रह गए अधूरे
पिता मंसूर आलम का दर्द शब्दों में बयां करना मुश्किल है. उन्होंने अपने लाडले बेटे की शादी की तैयारियां शुरू कर दी थीं. अगले वर्ष मार्च के महीने में घर में बेटी और बेटे दोनों के हाथ पीले करने की योजना थी. पिता ने बताया कि अम्मार उनके बुढ़ापे की लाठी था. घर की खुशियों को संजोने वाले पिता पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है और उनके आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं.
परिवार पर दुखों का साया
अम्मार के छोटे भाई उमर पर दुखों का साया और गहरा है. उमर ने भावुक होते हुए बताया कि अम्मार उनके लिए सिर्फ एक बड़े भाई नहीं, बल्कि पिता के समान थे। वह उमर की बीटेक की पढ़ाई और हर जरूरत का पूरा ध्यान रखते थे. घटना वाले दिन की याद साझा करते हुए उमर रो पड़े, “सोमवार को वह काम पर गए थे, मैं सो रहा था.मुझे क्या पता था कि वह आखिरी मुलाकात होगी.
मोहल्ले में मातम
अम्मार का व्यक्तित्व बेहद मिलनसार और जिम्मेदार था. उनकी असमय मौत से पूरे लखपेड़ाबाग में मातम पसरा हुआ है. आज जब उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया, तो जनाजे में भारी भीड़ उमड़ी. हर किसी की जुबान पर यही था कि एक होनहार और मेहनती युवक को काल ने समय से पहले छीन लिया. पीछे छूट गया एक टूटा हुआ परिवार और वे सपने, जो अब कभी पूरे नहीं हो सकेंगे। यह त्रासदी किसी के भी दिल को झकझोर देने के लिए काफी है.
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