bharat tiwari police encounter case: ये खबर बिहार में भरत तिवारी पुलिस एनकाउंटर मामले पर बढ़ती राजनीति, जनसुराज व राजद नेताओं के विरोध और मामले की संवेदनशीलता के कारण जेडीयू बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की चुप्पी के साथ साथ इस घटना के पड़ोसी राज्यों तक फैलते प्रभाव की पूरी जानकारी देता है.

bharat tiwari police encounter case: बिहार में इस समय भरत तिवारी एनकाउंटर मामले को लेकर सियासी तापमान आसमान छू रहा है. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि देश की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) दोनों ही बड़ी पार्टियों के राष्ट्रीय अध्यक्ष इसी बिहार राज्य से आते हैं. बीजेपी के मुखिया नितिन नवीन हों या फिर जेडीयू के कद्दावर नेता नीतीश कुमार, दोनों ही शीर्ष नेताओं ने इस पूरे संवेदनशील एनकाउंटर कांड पर अब तक पूरी तरह चुप्पी साध रखी है. शुरुआत में जब बीजेपी के कुछ स्थानीय नेताओं ने पुलिसिया कार्रवाई पर उंगली उठानी शुरू की, तो पार्टी के आलाकमान ने तुरंत सख्त रुख अपनाते हुए अपने प्रवक्ताओं और नेताओं को जांच पूरी होने तक इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने से साफ मना कर दिया.
इस पूरे मामले पर सरकार में शामिल जेडीयू के कद्दावर नेता अशोक चौधरी ने अपनी ही सरकार की पुलिस को कटघरे में खड़ा करते हुए एक बहुत ही तीखा बयान दिया है. उन्होंने बेहद भावुक अंदाज में पुलिस महकमे से सवाल पूछा कि जब एक मानसिक रूप से विक्षिप्त इंसान ने खुद को कानून के हवाले कर दिया था, तो उसे गोली मारने की क्या जरूरत थी. पुलिस चाहती तो उसे आसानी से गिरफ्तार कर सकती थी, दो चार डंडे मारकर थाने ला सकती थी और फिर उसका सही से मेडिकल कराकर इलाज के लिए अस्पताल भेज सकती थी. हमारे सिस्टम में यह सारी कानूनी व्यवस्था पहले से मौजूद है. इसके साथ ही अशोक चौधरी ने इस घटना पर हो रही विपक्षी राजनीति और महापंचायत के आयोजन पर भी कड़ा कटाक्ष किया है.
भरत तिवारी की मौत के बाद से भड़की जनता की नाराजगी अब सरकार के खिलाफ एक बहुत बड़े जनाक्रोश का रूप ले चुकी है. पिछले सात दिनों के भीतर यह पूरा मामला बिहार की कानून व्यवस्था के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन गया है. राज्य के कई राजनीतिक दल अब इस सुलगती हुई आग में अपनी सियासी रोटियां सेकने के लिए मैदान में कूद पड़े हैं. ‘जनसुराज’ अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर खुद बुधवार को पीड़ित परिवार के पक्ष में आयोजित महापंचायत में शामिल होने पहुंचे और उन्होंने सरकार की नीतियों की जमकर आलोचना की. वहीं, भोजपुरी फिल्मों के सुपर स्टार और राजद नेता खेसारी लाल यादव ने भी पीड़ित परिवार से मिलकर उन्हें 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी और इंसाफ के लिए एक बड़े आंदोलन की जरूरत पर जोर दिया.
यह पूरा एनकाउंटर मामला अब सिर्फ बिहार तक ही सीमित नहीं रह गया है. इसकी गूंज अब पड़ोसी राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल तक भी तेजी से पहुंच चुकी है. बुधवार को हुई महापंचायत में इन राज्यों से भी भारी तादाद में लोग पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए बिहार पहुंचे थे. इस विरोध प्रदर्शन के दौरान जब आक्रोशित भीड़ ने सीधे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए उनसे इस्तीफे की मांग शुरू कर दी, तो सरकार के होश उड़ गए. विपक्ष के कई दल इस पूरे माहौल का फायदा उठाकर एनडीए सरकार को पूरी तरह से बदनाम करना चाहते हैं, ताकि प्रशासन का मनोबल टूट जाए और राज्य में चल रही एनकाउंटर पॉलिसी पर हमेशा के लिए ब्रेक लग जाए.
चूंकि इस पूरे मामले में सीधे तौर पर पुलिसकर्मियों की भूमिका पर गंभीर आरोप लगे हैं और आरोपी अधिकारियों पर एफआईआर (FIR) भी दर्ज हो चुकी है, इसलिए नीतीश सम्राट की सरकार इस समय पूरी तरह से बैकफुट पर नजर आ रही है. यही मुख्य वजह है कि मुख्यमंत्री और दोनों पार्टियों के राष्ट्रीय अध्यक्ष इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई भी जल्दबाजी में आधिकारिक बयान देने का खतरा नहीं उठाना चाहते हैं. सरकार को डर है कि उनके मुंह से निकला एक भी गलत शब्द इस चुनावी माहौल में विपक्ष को एक बड़ा हथियार दे देगा. हालांकि अब इस मामले में करणी सेना की भी एंट्री हो चुकी है और सरकार ने बढ़ते दबाव को देखते हुए इस पूरे एनकाउंटर की न्यायिक जांच कराने का बड़ा एलान कर दिया है.
