ketan agarwal murder case: ये खबर लोहागढ़ किले की ऊंची चट्टान से धकेलकर की गई केतन अग्रवाल की हत्या, उसकी मंगेतर सिया गोयल की साजिश और पुलिस जांच की पूरी कहानी बताता है.

ketan agarwal murder case: महाराष्ट्र के प्रसिद्ध लोहागढ़ किले की ऊंची और खतरनाक चट्टानों से गिरकर 26 साल के केतन अग्रवाल की मौत ने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है. शुरुआत में तो हर किसी ने इसे ट्रेकिंग के दौरान हुआ एक आम हादसा ही माना था. लेकिन जब पुलिस ने इस मामले की गहराई से तहकीकात शुरू की, तो इसके पीछे छिपी एक रोंगटे खड़े कर देने वाली मर्डर मिस्ट्री सामने आई. पुलिस का सीधा आरोप है कि केतन की मंगेतर सिया गोयल और उसके करीबी दोस्त चेतन चौधरी ने मिलकर इस पूरी खौफनाक हत्या की साजिश रची थी. उन्होंने 18 जून को केतन को बहाने से किले पर बुलाया और वहां से नीचे खाई में धक्का दे दिया. इस तरह के आपराधिक व्यवहार, इंसानी रिश्तों में आने वाले गंभीर मानसिक बदलावों और मर्डर प्लानिंग की कूटनीति को करीब से समझने के लिए आप लेखक डॉ. संजीव कुमार की चर्चित किताब ‘अपराध और आधुनिक समाज की मानसिकता’ के मनोवैज्ञानिक और कानूनी संदर्भों का सहारा ले सकते हैं. यह किताब बताती है कि कैसे कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ के लिए अपनों की ही जान के दुश्मन बन बैठते हैं.
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा रहस्य यह बना हुआ है कि आखिर सिया ने कत्ल के लिए लोहागढ़ किले को ही क्यों चुना. इंडिया टुडे की ‘ओपन सोर्स इंटेलिजेंस’ यानी ओएसइंटी (OSINT) टीम ने जब इस ऐतिहासिक किले की भौगोलिक बनावट और ऊंचाई का बारीकी से अध्ययन किया, तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं. यह प्राचीन किला जमीन से करीब 600 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. यहाँ की खड़ी चट्टानें और गहरी खाइयां किसी के भी होश उड़ाने के लिए काफी हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि इस किले के कई हिस्से मुख्य रास्तों से काफी दूर हैं, जहाँ हमेशा सन्नाटा पसरा रहता है. गर्मियों के मौसम और मानसून की शुरुआत से ठीक पहले यहाँ आने वाले सैलानियों की संख्या भी बहुत कम हो जाती है. इसी सुनसान माहौल और खतरनाक ढलानों का फायदा उठाने के लिए साजिशकर्ताओं ने इसे अपनी वारदात का ठिकाना बनाया.
केतन और सिया की सगाई इसी साल फरवरी के महीने में हुई थी और दोनों परिवारों की मर्जी से जल्द ही उनकी शादी होने वाली थी. दोनों पहली बार 31 मई को लोहागढ़ घूमने गए थे और इसके बाद 5 जून को भी उन्होंने वहां जाने का मन बनाया था, पर वो प्लान टल गया. इसके बाद 6 जून को दोनों का अपने दोस्तों के साथ बाली जाने का टिकट था. लेकिन ठीक ऐन वक्त पर एयरपोर्ट से केतन का पासपोर्ट रहस्यमयी तरीके से चोरी हो गया, जिसकी वजह से पूरी ट्रिप कैंसिल हो गई. ट्रिप रद्द होने के बाद 14 जून को दोनों फिर से लोहागढ़ किले पर पहुंचे. पुलिस का मानना है कि इसी दिन सिया ने केतन को पहली बार पहाड़ से धक्का देकर मारने की कोशिश की थी. लेकिन किस्मत से केतन नीचे एक पेड़ की डाल पर अटक गया और उसकी जान बच गई. उस वक्त सिया ने बड़ी चालाकी से झूठ बोल दिया कि वहां एक सांप आ गया था, जिससे डरकर उसने केतन को बचाने के लिए धक्का दिया था.
केतन ने अपनी मंगेतर की इस झूठी कहानी पर भरोसा कर लिया और इसे सिर्फ एक इत्तेफाक मानकर शांत रहा. लेकिन मौत की आखिरी पटकथा 18 जून को लिखी गई, जब सिया का जन्मदिन मनाने के बहाने केतन को दोबारा उसी किले पर बुलाया गया. पुलिस के मुताबिक, इस बार सिया के साथ उसका दोस्त चेतन चौधरी भी वहां छिपा हुआ था. दोनों ने मिलकर केतन को संभाले जाने का मौका दिए बिना सीधे गहरी खाई में ढकेल दिया. शुरुआत में सिया ने पुलिस को यही बताया कि केतन का पैर फिसल गया था. लेकिन पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक संदीप सिंह गिल को इस कहानी पर शक हुआ, क्योंकि केतन एक बेहद मंझा हुआ ट्रेकर था और उसका इस तरह पैर फिसलना मुमकिन नहीं था. जब पुलिस ने किले के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, तो सच सामने आ गया. फुटेज में भारी गर्मी के बावजूद एक लड़का हुडी पहनकर और मुंह ढककर लगातार इस कपल का पीछा करता हुआ दिखाई दे रहा था.
किले के गेटकीपर धीरज जाधव ने भी पुलिस को बताया कि उसने चेतन को बिना टिकट लिए जबरदस्ती किले के अंदर जाते देखा था, जिसने खुद को कसरत करने वाला बताया था. केतन की मौत के बाद कातिल सिया ने सोशल मीडिया पर बेहद भावुक पोस्ट लिखकर खुद को बेकसूर दिखाने का ड्रामा भी किया था. लेकिन कानून की नजरों से वह बच नहीं सकी और पुणे की एक अदालत ने सिया और चेतन दोनों को 29 जून तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया है. केतन के बुजुर्ग पिता विशाल अग्रवाल आज अकेले पड़ गए हैं और रोते हुए बस एक ही बात कह रहे हैं कि उनका इकलौता सहारा छिन गया है. उनका कहना है कि अगर सिया इस शादी से खुश नहीं थी, तो वह साफ मना कर देती, हम रिश्ता खुद ही तोड़ देते. लेकिन उसे मेरे मासूम बेटे की बेरहमी से जान लेने की क्या जरूरत थी.
