बांकीपुर उपचुनाव: बिहार के बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव की तैयारियां काफी जोरों-शोरों से चल रही है. BJP नेता नितिन नबीन के इस्तीफा देने के बाद में यह सीट खाली हो गई है. दरअसल, नितिन नबीन को भारतीय जनता पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा का सांसद चुना गया. नियमों के अनुसार, एक व्यक्ति एक समय में केवल एक ही जगह पर सदस्य हो सकता है. वह विधानसभा और संसद दोनों का सदस्य नहीं हो सकता है. इसी कारण से उन्होंने यह पद छोड़ा. हालांकि, इस साल इस सीट पर होने वाले चुनाव की काफी खास बात है. दरअसल, बांकीपुर विधानसभा सीट के उपचुनाव पर खुद जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर चुनावी मैदान पर उतरने वाले हैं.
नितिन नबीन के परिवार का जलवा इस सीट पर
दरअसल, इस सीट की एक दिलचस्प बात यह है कि परिसीमन से पहले और बाद में भी नितिन नबीन का ही जलवा रहा है.
परिसीमन से पहले यह क्षेत्र पटना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के अंदर आता था. बीजेपी के वरिष्ठ नेता नवीन प्रसाद सिन्हा ने 1995 से लेकर 2005 तक इस सीट पर अपना कब्जा बनाए रखा.
2006 में इनके निधन के बाद में उनके बेटे नितिन नबीन ने इस पद को संभाला, जिसके बाद 2006 से लेकर 2025 तक नितिन नबीन ने अपना डेरा बनाए रखा.
नितिन नबीन के इस्तीफे के बाद में इस सीट पर फिर से चुनाव किया जा रहा है.
प्रशांत किशोर के उतरने से बांकीपुर उपचुनाव हुआ ऐतिहासिक?
दरअसल, हमेशा कोई न कोई उपचुनाव आता और जाता रहता है. हालांकि, इस बार का यह उपचुनाव लोगों के बीच में चर्चा का विषय बना हुआ है. खुद प्रशांत कुमार अपनी पार्टी की तरफ से इस बार बांकीपुर के ऐतिहासिक चुनावी मैदान में उतरने वाले हैं. अब तक केवल वह अपने ही पार्टी के लोगों को चुनावी मैदान में खड़ा करते थे. आम आदमी को चुनाव में उतारने के लिए फेमस प्रशांत किशोर ने ऐसे में खुद इस चुनावी मैदान में उतरने का फैसला लिया है. जो कि इस उपचुनाव को काफी दिलचस्प बना रहा है. लोगों में मन में कई सवाल उठते दिखाई दे रहे हैं. सभी लोगों के मन में यही सवाल है कि आखिर वह अचानक से ही उपचुनाव में अपनी जिंदगी का पहला चुनाव लड़ने के लिए क्यों उतर रहे हैं. कई लोगों का कहना है कि उनके इस कदम के पीछे कोई न कोई राज छिपा है. दरअसल, प्रशांत किशोर खुद एक राजनीतिक रणनीतिकार और चुनाव विश्लेषक है.
बता दें कि 2014 में उन्होंने बीजेपी और प्रधानमंत्री मोदी की चाय पर चर्चा और 3D प्रोग्राम को शुरू किया था. 2015 में नीतिश कुमार लालू यादव के महागठबंधन की रणनीति को बनाया. 2017 में पंजाब के कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह के लिए कॉफी विद कैप्टन जैसे सफल अभियान को चलाया. इसके अलावा अरविंद केजरीवाल और पश्चिम बंगाल चुनाव में ममता बनर्जी की जीत दिलाने में अहम किरदार निभाया.
ऐसे में क्या यह है संभव हो सकता है कि इस बार के चुनाव में खुद उतरकर वह इस सीट पर जीत हासिल करेंगे. हालांकि, यह तो समय ही बताएगा, लेकिन संभावना जताई जा रही है कि प्रशांत किशोर की सोची समझी रणनीति इस बार चुनाव में सफल हो सकती है.
क्यों सफल होने के उम्मीद
दरअसल, इसका कारण बिहार में अभी के समय में उठने वाले मुद्दों को देख कर ही समझा सकता है. भरत तिवारी केस से पूरे बिहार के लोगों का सम्राट चौधरी के प्रति गुस्सा देखने को मिल रहा है. ऐसे में उम्मीद है पार्टी के नेता की इन गलतियों को बिहार याद रखे और प्रशांत किशोर इसी गलती का फायदा उठा लें.
कब है चुनाव?
सभी पार्टियों को 13 जुलाई 2026 तक नामांकन के निर्देश दिए गए है. वहीं, 30 जुलाई को इस सीट पर मतदान किया जाएगा. 3 अगस्त 2026 को मतगणना होगी.
किस पार्टी से किस नेता को गया उतारा
RJD/महागठबंधन से रेखा गुप्ता को मैदान में उतारा जा रहा है.
बीजेपी की तरफ से अभिषेक कुमार को मैदान में उतारा जा रहा है.
जनशक्ति जनता दल से वीना मानवी को बनाया गया उम्मीदवार.
जनसुराज पार्टी से प्रशांत किशोर उतर रहे मैदान में
प्रशांत किशोर और बीजेपी दोनों की प्रतिष्ठा के लिए जरूरी सीट
ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि यह सीट सालों से बीजेपी का गढ़ रही है. सालों से इस पर बीजेपी ही जीत हासिल करते रही है.
वहीं, प्रशांत किशोर जो सिर्फ आम लोगों को अपनी पार्टी से उम्मीदवार के रूप में उतरवाते थे. वह अब खुद इस बांकीपुर उपचुनाव में उतरने वाले हैं.
दोनों के लिए इस सीट पर जीत हासिल करना काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सभी के लिए यह चुनावी चर्चा का केंद्र बना हुआ है.
ये भी पढ़ें: बांकीपुर उपचुनाव: RJD की तरफ से रेखा गुप्ता को उम्मीदवार बनाए जाने पर कांग्रेस नाराज, महागठबंधन में बढ़ी तकरार?
