राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में नए मुद्दे को लेकर चर्चा हुई है. आरोप है कि चंपत राय को पहले ही दान में गड़बड़ी की जानकारी मिली थी, लेकिन फिर भी शिकायत दर्ज क्यों नहीं कराई गई. यह मुद्दा काफी तेजी के साथ उठ रहा है.

आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ
राम मंदिर में दान चोरी को लेकर लगातार जांच की जा रही है. अब इस जांच को लेकर पुलिस का मानना है कि कई अहम तथ्यों का खुलासा सिर्फ दस्तावेजों से नहीं, बल्कि आरोपियों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करने से हो सकता है. अब इसी सिलसिले में अयोध्या पुलिस ने अनुकल्प मिश्रा, लव कुश मिश्रा और करुणेश पांडेय को रिमांड पर लिया है और उनसे पूछताछ शुरू की है.
पता लगने के बाद क्यों नहीं हुई कार्रवाई
ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार होने के बाद यह मामला धीरे-धीरे शांत होता दिखा था, लेकिन बैठक के बाद फिर से कई सवाल खड़े हो गए हैं. बैठक में इस बात पर चर्चा की गई है कि कथित चोरी का पता लगने के बाद भी तत्काल रूप से कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की गई. आरोप है कि चंपत राय को 5 जून को ही दान में गड़बड़ी की जानकारी मिल गई थी.
अखिलेश यादव ने सार्वजनिक किया मुद्दा
जानकारी के मुताबिक पुलिस ने चोरी की गई रकम को भी बरामद कर लिया था, लेकिन उसके बाद भी उस समय किसी तरह की FIR दर्ज नहीं की गई. अब इन बातों को लेकर फिर से विवाद शुरू हो गया है. इस मामले के बाद 7 जून को समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने इस मामले को सार्वजनिक किया था, जिसके बाद यह व्यापक चर्चा की विषय बन गया.
चंपत राय की भूमिका पर सवाल
ट्रस्ट की बैठक में बात उठी है कि अगर शुरुआती स्तर पर कार्रवाई होती, तो यह विवाद इतना नहीं बढ़ता. आपको बता दें कि राम मंदिर के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद चंपत राय की राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावशाली छवि बनी थी, लेकिन हाल की घटना के बाद उनकी भूमिका को लेकर बड़े सवाल खड़े होने लगे हैं. सवाल उठ रहा है कि चोरी की बरामदगी के बाद भी पुलिस में शिकायत दर्ज क्यों नहीं कराई गई.
यह भी पढ़ें- सपा के पूर्व विधायक पर ED का एक्शन! आय से अधिक संपत्ति के मामले में छापेमारी; कई ठिकानों पर पहुंची टीम
