Omar abdullah bjp: जम्मू कश्मीर के सीएम उमर अब्दुल्ला ने बीजेपी पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायक को तोड़ने के लिए ₹20 30 करोड़ और मंत्री पद का ऑफर देने का आरोप लगाते हुए केंद्र को उनकी शराफत को कमजोरी न समझने की चेतावनी दी है.

Omar abdullah bjp: जम्मू कश्मीर की राजनीति में एक बार फिर से बहुत बड़ा भूचाल आ गया है भाई. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भारतीय जनता पार्टी पर सरकार गिराने की साजिश रचने का एक बेहद संगीन आरोप लगाया है. उमर का सीधा दावा है कि बीजेपी ने उनकी पार्टी यानी नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों को खरीदने के लिए करोड़ों रुपये का जाल फेंका था. इस बड़े खुलासे के बाद से ही श्रीनगर से लेकर दिल्ली तक सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है. उमर अब्दुल्ला ने साफ लफ्जों में कहा है कि केंद्र सरकार उनकी शराफत को कमजोरी समझने की भूल बिल्कुल न करे. आइए जानते हैं कि उमर अब्दुल्ला ने अपनी रैली में क्या क्या बड़े दावे किए हैं और सूबे की सियासत में इस समय क्या खिचड़ी पक रही है.
सुप्रीम कोर्ट के वकील के जरिए मिला था करोड़ों रुपये और मंत्री पद का बड़ा लालच
श्रीनगर के हजरतबल में अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए सीएम उमर अब्दुल्ला ने इस पूरी साजिश का कच्चा चिट्ठा खोल दिया. उन्होंने मंच से बताया कि जम्मू इलाके के उनके एक विधायक को तोड़ने की पूरी कोशिश की गई थी. इस काम के लिए बाकायदा सुप्रीम कोर्ट के एक नामी वकील को मोहरा बनाया गया था. उस वकील के जरिए विधायक को 20 से 30 करोड़ रुपये कैश देने का ऑफर दिया गया था. इतना ही नहीं, पाला बदलने के बदले में उन्हें नई सरकार में मंत्री पद देने और जम्मू कश्मीर का पुराना राज्य का दर्जा बहाल कराने का भी भरोसा दिया गया था. उमर ने गर्व से कहा कि उनके विधायक बिकने वाले नहीं हैं, इसलिए बीजेपी का यह तख्तापलट का प्लान पूरी तरह से फेल हो गया.
केंद्र सरकार का वो ‘सही समय’ आखिर कब आएगा, उमर ने पूछा तीखा सवाल
इस रैली के दौरान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू कश्मीर को दोबारा पूर्ण राज्य का दर्जा देने के मुद्दे पर केंद्र की मोदी सरकार को जमकर घेरा. उन्होंने केंद्र के उस पुराने रटे रटाए बयान पर तंज कसा, जिसमें हमेशा ‘सही समय आने पर’ पूर्ण राज्य का दर्जा वापस देने की बात कही जाती है. उमर ने कड़क आवाज में पूछा कि आखिर वह सही समय कब आएगा? क्या सूबे की जनता को अपने लोकतांत्रिक अधिकार वापस पाने के लिए अभी कोई और परीक्षा देनी बाकी है? उन्होंने याद दिलाया कि जनता ने भारी संख्या में वोट देकर अपनी चुनी हुई सरकार बना दी है, फिर भी दिल्ली अपने वादे को पूरा करने में लगातार आनाकानी कर रही है.
हमारी खामोशी और शांति को कमजोरी समझने की भूल कतई न करे दिल्ली
उमर अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार को बड़े सख्त लहजे में चेतावनी भी दे डाली है. उन्होंने कहा कि वे हमेशा से बातचीत और शांति के जरिए अपने हक हासिल करने के हकदार रहे हैं. लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि वे चुप बैठेंगे या अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना बंद कर देंगे. उमर ने कहा कि जब केंद्र सरकार लद्दाख के नेताओं और वहां के लोगों से टेबल पर बैठकर बात कर सकती है, तो फिर जम्मू कश्मीर के नुमाइंदों के साथ बातचीत करने में क्या दिक्कत है? चीजें पूरी तरह से साफ होनी चाहिए ताकि सूबे का विकास सही तरीके से आगे बढ़ सके.
जब अफसरों की मदद से हाथ ही बांधने थे, तो फिर चुनाव का नाटक क्यों किया?
मुख्यमंत्री ने जम्मू कश्मीर के प्रशासनिक कामकाज में आ रही दिक्कतों पर भी खुलकर अपनी भड़ास निकाली. उनका सीधा आरोप है कि चुनी हुई सरकार को अपनी मर्जी से फैसले लेने की आजादी नहीं दी जा रही है. अफसरशाही के जरिए सारा कंट्रोल आज भी राजभवन यानी एलजी दफ्तर से चलाने की कोशिश हो रही है. उमर ने गुस्से में सवाल उठाया कि अगर अधिकारियों की मदद से सरकार के हाथ पैर पीछे ही बांधने थे, तो फिर सूबे में करोड़ों रुपये खर्च करके चुनाव कराने का यह बड़ा नाटक क्यों रचा गया? हालांकि, उन्होंने साफ कर दिया कि चाहे जितनी भी रुकावटें आएं, वे जनता की उम्मीदों पर खरे उतरने के लिए दिन रात मेहनत करते रहेंगे.
