प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर पर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले दो आरोपियों आयुष ठाकुर और अभय को कोई भी राहत देने से इंकार कर दिया है. हाईकोर्ट ने आरोपियों की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने और पुलिस गिरफ्तारी पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी.
दो आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
मामला बुलंदशहर जिले के खुर्जा थाने का है, जहाँ 15 अप्रैल 2026 को दोनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था. आरोप है कि दोनों ने अपनी सोशल मीडिया आईडी से डॉ. बी.आर. अंबेडकर को लेकर अत्यंत आपत्तिजनक और भड़काऊ पोस्ट साझा की थी, जिससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया था.
‘आईडी हैक होने’ की दलील हुई खारिज
याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट में तर्क दिया गया कि उन्होंने यह पोस्ट खुद नहीं की थी, बल्कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनकी सोशल मीडिया आईडी हैक करके यह आपत्तिजनक टिप्पणी की है. इसलिए उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त किया जाए.
वकील ने किया पुरजोर विरोध
राज्य सरकार की ओर से पेश हुए सरकारी वकील ने याचिका का पुरजोर विरोध किया. उन्होंने कोर्ट को बताया कि शुरुआती जांच में पोस्ट याचियों द्वारा ही किए जाने के साक्ष्य मिले हैं. सरकारी वकील ने कहा कि इस तरह की आपत्तिजनक टिप्पणियों से सामाजिक सौहार्द और शांति व्यवस्था बिगड़ने का सीधा खतरा पैदा हुआ है, इसलिए आरोपी किसी भी प्रकार की न्यायिक राहत के हकदार नहीं हैं.
पुलिस जांच को रोकना उचित नहीं-हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद टिप्पणी की कि ऐसे मामलों में पुलिस जांच को रोकना उचित नहीं है. कोर्ट ने याचियों की अर्जी को खारिज करते हुए पुलिस को मामले की नियमानुसार निष्पक्ष जांच जारी रखने के आदेश दिए.
