जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन का आखिर अंत हो ही गया है. दरअसल, सीजेपी की सारी मांगे पूरी हो चुकी है. महीने भर के इस आंदोलन ने पूरे देश की राजनीति में हलचल बना रखी थी. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने के बाद में अन्ना हजारे का भी रिएक्शन सामने आया है. उन्होंने अपने आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा है कि कैसे आंदोलनों का हल बिना किसी हिंसा के भी हो सकता है.
अन्ना हजारे का प्रदर्शन पर आया रिएक्शन
अन्ना हजारे ने अपना रिएक्शन देते हुए कहा है कि किसी भी समस्या का समाधान हिंसा ने नहीं है. जनता के सवाल हमेशा से संवाद और लोकतांत्रिक तरीके से सुलझाए गए है. किसी भी रास्ते में हिंसा का रास्ता अपना लेना उचित नहीं होता है. हर परिस्थिति में शांतिपूर्ण विरोध को ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए. उन्होंने अपना प्रदर्शन का उदाहरण देते हुए बोला कि लोकतंत्र में बातचीत ही सबसे प्रभावी तरीका है. साथ ही उन्होंने कहा कि जीवन में जनता के हित के लिए 22 बार अनशन किए थे, लेकिन कभी भी हिंसा को अपना सहारा नहीं बनाया था. अनुशासित अहिंसक आंदोलनों के दबाव में अब तक 10 बड़े कानून बने हैं. शातिपूर्वक और सकारात्मक तरीके से भी सरकार पर प्रभाव पड़ता है. सत्ता को लोगों को जनता की वास्तविक मांगो को समझना चाहिए. हित और समस्या के समाधान के लिए सरकार को दो कदम आगे बढ़ना चाहिए. उसमें संकोच नहीं करना चाहिए. सरकार का उद्देश्य जनहित होना चाहिए. इस्तीफे के बाद में कौन जीता है कौन हारा है, यह मुद्दा नहीं होना चाहिए. जरूरी ये होना चाहिए कि जनता के हित के लिए जो संभव है वहीं करते रहना चाहिए. किसी भी व्यक्ति या संगठन को हिंसक रास्ता नहीं अपनाना चाहिए. किसी भी परिस्थिति में हिंसा का रास्ता अपनाना ही नहीं चाहिए.
प्रोटेस्ट हुआ खत्म
बता दें कि सीजेपी की सबसे बड़ी मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थी, जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा स्वीकार कर लिया गया है. अब शिक्षा मंत्रालय के पद के लिए केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को चुना गया है. इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर प्रदर्शन खत्म हो चुका है. सीजेपी ने लोगों को अपने-अपने घर जाने के लिए बोल दिया है.
