Hypersonic missile: भारत अपनी रक्षा क्षमता को मजबूत करने के लिए हाइपरसोनिक मिसाइल ध्वनि विकसित कर रहा है, जिसकी गति 7400KM से अधिक है और यह दुश्मन के राडार और एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा दे सकती है.

Hypersonic missile: भारत अपनी रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए हाइपरसोनिक मिसाइल प्रोजेक्ट ध्वनि पर तेजी से काम कर रहा है. इस मिसाइल की खासियत यह है कि इसकी रफ्तार 7400 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक है और यह अपने रास्ते में अचानक मोड़ लेकर दुश्मन के राडार और एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने का काम कर सकती है. DRDO वर्ष 2026 की पहली तीन महीने में इस मिसाइल का पहला उड़ान परीक्षण करने की तैयारी में है.
ध्वनि हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल बूस्ट-ग्लाइड तकनीक पर आधारित है. इसमें पहले रॉकेट बूस्टर मिसाइल को ऊंचाई तक ले जाता है और फिर यह वायुमंडल में बेहद तेज गति से ग्लाइड करते हुए टारगेट की ओर बढ़ती है. इसकी गति और दिशा बदलने की क्षमता इसे रोकना दुश्मन के लिए बेहद कठिन बनाती है, यह मिसाइल केवल नॉर्मल हथियार नहीं बल्कि परमाणु हथियारों के साथ भी इस्तेमाल हो सकती है.
इस परियोजना में एडवांस थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है, जो अधिक तापमान को सहन कर सकता है. हाइपरसोनिक गति पर वायुमंडल में प्रवेश करते समय वाहन पर हजारों डिग्री तापमान पैदा होता है. ध्वनि का ब्लेंडेड विंग-बॉडी डिजाइन इसे अधिक लिफ्ट देता है और राडार से बचने में मदद करता है. DRDO की पिछली सफलताओं और तकनीकी अनुभव पर आधारित यह मिसाइल भारत की सामरिक क्षमता को पूरी दुनिया में दिखाने का काम करेगा.
ध्वनि की मारक दूरी शुरुआती वर्जन में लगभग 1,500 किलोमीटर हो सकती है, और भविष्य में इसे Intercontinental Level (यानी जो मिसाइन 5500KM की रफ्तार पकड़ लेता है) तक विकसित किया जा सकता है. इस मिसाइल की अनलिमिटेड रेंज और कम ऊंचाई की वजह से मौजूदा राडार और इंटरसेप्टर सिस्टम इसे समय पर पहचान नहीं पाएंगे. यह भारत की सेकंड स्ट्राइक क्षमता को मजबूत करेगी और किसी भी परिस्थिति में देश को जवाबी कार्रवाई का भरोसेमंद साधन देने का काम करेगी.
सफल परीक्षण के बाद यह मिसाइल भारतीय सेना में 2029-2030 के आसपास शामिल हो सकती है. ध्वनि परियोजना न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि स्वदेशी हथियार तकनीक और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी आगे बढ़ाने का काम करेगी.
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