parliament monsoon session 2026: संसद के मॉनसून सत्र के आखिरी दो दिनों से पहले भाजपा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए गृह मंत्री अमित शाह का बयान सुनने और छात्र आंदोलन के मुद्दे पर सार्थक बहस की चुनौती दी है.

parliament monsoon session 2026: संसद का मॉनसून सत्र अपने बिल्कुल आखिरी दौर में पहुंच गया है. अब सत्र के सिर्फ दो ही कामकाजी दिन बचे हैं. आखिरी दिन तो वैसे भी दोपहर तक सदन अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया जाता है. देखा जाए तो यह पूरा सत्र हंगामे और राजनीतिक खींचतान की भेंट चढ़ गया. हालांकि सरकार कुछ अहम बिल पास कराने में जरूर कामयाब रही. अगर गंभीर चर्चा की बात करें तो केवल ‘एंटी-पेपर लीक बिल’ पर ही ठीक से बहस हो सकी. बाकी किसी बड़े बिल पर विपक्ष और सरकार के बीच कोई ठोस बात नहीं हो पाई.
छात्र आंदोलन और शिक्षा मंत्री का इस्तीफा
सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष ने छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा जोर-शोर से उठाया. विपक्षी सांसदों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को निशाने पर ले लिया. दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का प्रदर्शन जारी था और संसद में विपक्ष का भारी दबाव था. इस चौतरफा दबाव के चलते सत्र के पहले हफ्ते के खत्म होते-होते धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. लेकिन शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद भी संसद में हंगामा शांत नहीं हुआ, बल्कि विरोध का रुख गृह मंत्री अमित शाह की तरफ मुड़ गया.
अमित शाह पर निशाने और FCRA बिल का विवाद
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का आदेश सीधे गृह मंत्री अमित शाह की ओर से दिया गया था. सरकार ने इस आरोप को तुरंत खारिज किया. इसी बीच विदेशी चंदे से जुड़ा FCRA (अमेंडमेंट) बिल चर्चा में आ गया. इस बिल पर ईसाई समुदाय के प्रतिनिधियों ने कुछ चिंताएं जताईं. गृह मंत्री अमित शाह ने उनसे बात की और भरोसा दिया कि सभी पक्षों की बात सुनकर ही आगे बढ़ा जाएगा. अब सरकार इस बिल को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने पर विचार कर रही है.
परिसीमन विधेयक पर भी नहीं बनी सहमति
इस सत्र में परिसीमन (डिलिमिटेशन) बिल को लेकर भी सरकार ने काफी जोर लगाया. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मुद्दे पर राहुल गांधी के साथ तीन दौर की बैठकें कीं. राहुल गांधी की मांग थी कि सरकार पहले इस पर सर्वदलीय बैठक बुलाए. दूसरी ओर सरकार का कहना था कि अगर कांग्रेस बिल का समर्थन करने को तैयार हो, तभी बैठक का कोई मतलब बनता है. अगर विरोध ही करना है तो बैठक का कोई फायदा नहीं होगा. इस वजह से इस बिल पर भी कोई बात आगे नहीं बढ़ पाई.
भाजपा का तीखा हमला और राहुल गांधी को चुनौती
सदन में जारी इस गतिरोध के बीच भाजपा नेता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी सत्र के दौरान सदन से भाग खड़े होते हैं और फिर विदेश चले जाते हैं. उन्होंने चुनौती देते हुए कहा, “डरिए मत, भागिए मत. विदेश जाने से पहले थोड़ी हिम्मत जुटाइए और गृह मंत्री अमित शाह का बयान सुनने का साहस दिखाइए.” सरकारी सूत्रों का कहना है कि गृह मंत्री न केवल छात्रों के प्रदर्शन पर जवाब देने को तैयार हैं, बल्कि इस पर पूरे विस्तार से चर्चा कराने को भी तैयार हैं.
कांग्रेस की मांग और संसद के आखिरी दो दिन
दूसरी तरफ कांग्रेस अपनी मांगों पर अड़ी हुई है. राहुल गांधी का कहना है कि देश को सिर्फ बयान नहीं चाहिए, बल्कि यह जानना है कि छात्रों पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया. कांग्रेस ने साफ कहा है कि जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े मुद्दों पर माफी नहीं मांगते, उनका विरोध जारी रहेगा. अब देखने वाली बात यह होगी कि मॉनसून सत्र के इन आखिरी दो दिनों में कोई सार्थक बहस हो पाती है या फिर यह सत्र भी पूरी तरह हंगामे की बलि चढ़ जाएगा.
