Share Market Crash Today: इस लेख में जानिए भारतीय शेयर बाजार में पिछले 7 दिनों से जारी गिरावट के मुख्य कारण, निफ्टी के 24,000 सपोर्ट लेवल का गणित और कच्चे तेल व विदेशी निवेशकों की बिकवाली का पूरा असर.

Share Market Crash Today: भारतीय शेयर बाजार में पिछले सात दिनों से लगातार बिकवाली का माहौल बना हुआ है. सेंसेक्स पिछले छह कारोबारी सत्रों में 78,560 के स्तर से गिरकर 76,909.68 पर आ चुका है. वहीं निफ्टी 50 भी सात दिनों में 24,600 के करीब से फिसलकर 24,078.30 के स्तर पर पहुंच गया है. न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सात दिनों में बाजार में करीब 2.1 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज हुई है. लगातार हो रही इस बिकवाली से छोटे निवेशकों से लेकर बड़े जानकार तक परेशान हैं. सभी के मन में एक ही डर है कि यह गिरावट कहां जाकर थमेगी.
24 हजार का लेवल टूटने पर बढ़ेगी मुसीबत
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर बेहद अहम माना जा रहा है. एलकेपी सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक दे का कहना है कि यह एक मजबूत सपोर्ट लेवल है. अगर निफ्टी 24,000 के नीचे चला जाता है और वहीं बना रहता है तो बाजार का शॉर्ट टर्म ट्रेंड मंदी की ओर जा सकता है. ऐसे में आने वाले दिनों में भारतीय बाजार में और भी तेज गिरावट देखने को मिल सकती है. इसलिए 24,000 का स्तर निवेशकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण बना हुआ है.
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई टेंशन
बाजार में इस भारी बिकवाली के पीछे पहला बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतें हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव बढ़कर 92 डॉलर प्रति बैरल के पास पहुंच गया है. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल बाहर से खरीदता है. ऐसे में तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ जाता है. इससे महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा हो जाती है. यही वजह है कि निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं और अपना पैसा बाजार से निकाल रहे हैं.
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव से अनिश्चितता
शेयर बाजार में गिरावट की दूसरी बड़ी वजह वेस्ट एशिया में बना तनाव है. अमेरिका और ईरान के बीच खींचतान जारी है. इसके साथ ही युद्धविराम को लेकर भी कोई साफ स्थिति नहीं बन पा रही है. इस अनिश्चितता के कारण ग्लोबल मार्केट में जोखिम बढ़ गया है. जब भी दुनिया में राजनीतिक या युद्ध जैसी स्थिति बनती है, निवेशक जोखिम वाले संपत्तियों से अपना पैसा निकालने लगते हैं. भारतीय बाजार में भी यही देखने को मिल रहा है.
विदेशी निवेशकों की बिकवाली और बॉन्ड यील्ड
तीसरा सबसे बड़ा कारण अमेरिका में ट्रेजरी यील्ड का लगातार बढ़ना है. अमेरिका और अन्य विकसित देशों में बॉन्ड यील्ड में तेजी आई है. इसके चलते विदेशी संस्थागत निवेशकों के लिए विकसित बाजार ज्यादा सुरक्षित और आकर्षक बन गए हैं. रॉयटर्स की रिपोर्ट बताती है कि साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से लगभग 25 अरब डॉलर की भारी निकासी कर चुके हैं. विदेशी पैसों के लगातार बाहर जाने से भारतीय शेयर बाजार पर बहुत ज्यादा दबाव बना हुआ है.
तमाम सेक्टरों में दिखा बिकवाली का असर
19 अगस्त के कारोबारी दिन में बाजार के लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों में भारी दबाव देखा गया. कंज्यूमर, फाइनेंशियल सर्विसेज और आईटी शेयरों को अगर छोड़ दें तो बाकी सभी सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए. ऑटोमोबाइल, बैंकिंग, एफएमसीजी, मीडिया, हेल्थकेयर और फार्मा जैसे सभी बड़े सेक्टरों में शेयर धड़ाम हो गए. विश्लेषकों का मानना है कि जब तक ग्लोबल संकेत बेहतर नहीं होते और विदेशी निवेशक बिकवाली बंद नहीं करते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा.
