makkah pact activation pakistan: इस खबर में जानिए सऊदी अरब पर हूती हमलों के बाद पाकिस्तान द्वारा मक्का पैक्ट एक्टिवेट करने की तैयारियों के बारे में। समझिए कि क्या पाकिस्तानी सेना यमन में एयरस्ट्राइक करेगी और कैसे यह समझौता पूरे मिडिल ईस्ट के समीकरण बदल सकता है.

makkah pact activation pakistan: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है. सऊदी अरब पर हूती विद्रोहियों के हालिया हमलों के बाद मक्का समझौते को लेकर हलचल तेज हो गई है. यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं. इस हमले में करीब 73 लोग घायल हो गए हैं. इस घटना के तुरंत बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अगर यह जंग सऊदी अरब के इलाके तक फैलती है, तो मक्का पैक्ट की सामूहिक रक्षा वाली शर्त को लागू किया जा सकता है. इसका सीधा मतलब यह है कि सऊदी की मदद के लिए पाकिस्तान यमन में हूतियों पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है.
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री की सीधी चेतावनी
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक टीवी इंटरव्यू में साफ कहा कि समझौते के नियम बहुत स्पष्ट हैं. उन्होंने बताया कि मक्का पैक्ट के तहत किसी भी एक सदस्य देश पर हुआ हमला, सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा. ख्वाजा आसिफ के मुताबिक, अगर बिना किसी वजह के सऊदी अरब पर हमले होते हैं, तो पाकिस्तान मक्का समझौते की शर्तों से बंधा हुआ है. वे इस संधि का पालन करने के लिए पूरी तरह मजबूर होंगे. रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि हूतियों को अपने अंदरूनी विवाद को बाहर नहीं फैलाना चाहिए. अगर ऐसा हुआ, तो संयुक्त रक्षा का नियम तुरंत लागू हो जाएगा.
क्या यमन में एयरस्ट्राइक करेगा पाकिस्तान?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान की सेना यमन में हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर हवाई हमले करने की योजना बना सकती है. सैन्य सूत्रों का कहना है कि अगर कोई कार्रवाई होती है, तो पाकिस्तान की पहली प्राथमिकता सादा और आसपास के इलाकों से हूतियों को खदेड़ने की होगी. हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों की राय इसमें थोड़ी अलग है. विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही ख्वाजा आसिफ बड़े दावे कर रहे हों, लेकिन असल में पाकिस्तान की भूमिका सीधी बमबारी करने से ज्यादा लॉजिस्टिक्स और पर्दे के पीछे सहयोग देने तक सीमित हो सकती है.
क्या है मक्का पैक्ट और कौन-कौन है शामिल?
मक्का समझौते पर पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब ने मिलकर हस्ताक्षर किए हैं. इसके साथ ही इस्लामाबाद और रियाद के बीच एक रणनीतिक आपसी रक्षा समझौता भी पहले से लागू है. इस समझौते का सबसे मुख्य नियम यह है कि अगर किसी एक देश की संप्रभुता पर खतरा आता है, तो बाकी देश उसकी मदद के लिए आगे आएंगे. सऊदी अरब लंबे समय से ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमलों का सामना कर रहा है. 2015 में भी सऊदी ने यमन में हूतियों को खत्म करने के लिए सैन्य अभियान चलाया था, लेकिन वह कोशिश पूरी तरह सफल नहीं हो पाई थी.
विशेषज्ञों की राय और मौजूदा जमीनी स्थिति
बर्मिंघम यूनिवर्सिटी के मध्य पूर्व मामलों के जानकार उमर करीम के अनुसार, हूतियों से रियाद को बहुत बड़ा खतरा है. ऐसे में मक्का समझौते को एक्टिवेट करने की स्थिति बन रही है. उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के पास पहले से ही सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए जमीन पर सैन्य मौजूदगी है. अगर इस्लामाबाद इस समझौते को लागू करने के पक्ष में फैसला लेता है, तो उसकी भूमिका मुख्य रूप से सुरक्षात्मक यानी डिफेंसिव होगी. वहीं कुछ विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी अरब यमन में एक बार फिर से जमीनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है.
भविष्य में क्या हो सकते हैं इस तनाव के नतीजे?
अगर यमन और सऊदी अरब के बीच यह संघर्ष आगे बढ़ता है, तो पूरे खाड़ी क्षेत्र में बड़ा संकट पैदा हो सकता है. इस विवाद में पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों के सीधे शामिल होने से जंग का दायरा काफी बढ़ सकता है. हालांकि, अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस कोशिश में लगा है कि बातचीत के जरिए स्थिति को शांत किया जाए. पाकिस्तान ने भी उम्मीद जताई है कि मामला जल्द ही नियंत्रण में आ जाएगा. लेकिन हूतियों की तरफ से लगातार हो रहे हमले इस बात का संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में यह तनाव आसानी से थमने वाला नहीं है.
