asim-munir donald trump: इस खबर में जानिए पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर के अमेरिका प्रेम से नाराज चीन का बड़ा कदम. CPEC के पावर प्रोजेक्ट्स से चीनी कंपनियों के पीछे हटने, फंसे अरबों डॉलर के कर्ज और पाकिस्तान पर गहराते नए संकट की पूरी कहानी.

asim-munir donald trump: अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी का गणित बहुत तेजी से बदलता है. पाकिस्तान और चीन के बीच की तथाकथित ‘सदाबहार दोस्ती’ में भी अब बड़ी दरार पड़ती दिखाई दे रही है. पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर का झुकाव अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिका की तरफ तेजी से बढ़ रहा है. इस बदलाव ने चीन को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है. चीन अब पाकिस्तान में फँसे अपने अरबों डॉलर के निवेश को सुरक्षित निकालने और नए प्रोजेक्ट्स से पीछे हटने की तैयारी कर रहा है. इससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है.
बिजली सेक्टर से पीछे हटने लगे चीनी निवेशक
पाकिस्तान के पावर सेक्टर में चीन ने सबसे ज्यादा पैसा लगाया था. लेकिन अब चीनी कंपनियाँ एक-एक करके अपने कदम पीछे खींच रही हैं. हाल ही में ‘पावर चाइना’ की एक सहयोगी कंपनी ने फैसलाबाद इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी (FESCO) को खरीदने की प्रक्रिया से खुद को अलग कर लिया. इससे पहले शंघाई इलेक्ट्रिक पावर ने भी के-इलेक्ट्रिक में 1.77 अरब डॉलर की हिस्सेदारी खरीदने की सालों पुरानी डील रद्द कर दी थी. इसके अलावा ग्वादर में बनने वाला 300 मेगावाट का पावर प्लांट भी लगभग ठप हो चुका है.
CPEC के तहत फँसा चीन का अरबों डॉलर का कर्ज
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के तहत चीन ने पाकिस्तान में सड़कों और बंदरगाहों के अलावा बड़े बिजली घर बनाए थे. इनमें साहीवाल, पोर्ट कासिम और हब जैसे 1320 मेगावाट के बड़े कोयला पावर प्लांट शामिल हैं. केवल पोर्ट कासिम प्रोजेक्ट में ही चीनी कंपनी का लगभग 2.085 अरब डॉलर लगा हुआ है. चीन ने पाकिस्तान में केवल कागजी वादे नहीं किए थे, बल्कि अपनी गाढ़ी कमाई यहाँ लगाई थी. अब पाकिस्तान में बढ़ते बिजली घाटे और बिल न चुका पाने की वजह से चीन अपनी फँसी पूँजी को लेकर बेहद चिंतित है.
सस्ते सोलर पैनल ने बिगाड़ा चीनी कंपनियों का खेल
पाकिस्तान में बिजली का घाटा बहुत तेजी से बढ़ा है. जून 2024 तक यह घाटा 2.4 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये तक पहुँच गया था. इसे वसूलने के लिए सरकार ने बिजली बिलों में भारी टैक्स जोड़ दिए. इसी बीच बाजार में चीन के ही बनाए सस्ते सोलर पैनल पहुँच गए. साल 2017 में सोलर पैनल की कीमत 0.35 डॉलर प्रति वाट थी, जो 2025 तक घटकर सिर्फ 0.08 डॉलर प्रति वाट रह गई. इसके बाद पाकिस्तान के आम लोगों और कारोबारियों ने भारी मात्रा में सोलर पैनल लगवा लिए और सरकारी बिजली का इस्तेमाल कम कर दिया, जिससे चीनी पावर प्लांटों की कमाई पूरी तरह ठप हो गई.
अमेरिका की शरण में पहुँचे पाकिस्तान के वित्त मंत्री
चीन का भरोसा टूटने के बाद अब पाकिस्तान अमेरिका के सामने झोली फैलाने को मजबूर है. पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब अमेरिकी संस्थानों से फंडिंग और नया निवेश हासिल करने की कोशिश में जुट गए हैं. पाकिस्तान अब अमेरिकी संस्थाओं से कर्ज लेने के लिए जी-तोड़ कोशिशें कर रहा है ताकि चीन पर अपनी निर्भरता कम कर सके. फिलहाल पाकिस्तान पर कुल विदेशी कर्ज का लगभग 23 फीसदी हिस्सा अकेले चीन का है. लेकिन अमेरिका से भी तुरंत मदद मिलना बेहद मुश्किल नजर आ रहा है.
आने वाले दिनों में और गहराएगा पाकिस्तान का संकट
चीन के प्रोजेक्ट्स बंद होने और अमेरिका से पर्याप्त आर्थिक मदद न मिलने से पाकिस्तान दोहरे संकट में फँस चुका है. एक तरफ चीन अपना पुराना फँसा हुआ पैसा वापस माँग रहा है, तो दूसरी तरफ पाकिस्तान के पास नए कर्ज चुकाने के पैसे नहीं हैं. जनरल आसिम मुनीर का अमेरिका के करीब जाना भले ही एक बड़ा राजनीतिक दांव दिख रहा हो, लेकिन इसने पाकिस्तान के सबसे बड़े मददगार चीन को नाराज कर दिया है. इस बदलती स्थिति की वजह से आने वाले दिनों में पाकिस्तान के आम लोगों को और भीषण महंगाई व बिजली संकट का सामना करना पड़ सकता है.
