uae refuses 2 billion dollar loan pakistan: पाकिस्तान के सऊदी अरब के साथ बढ़ते रक्षा संबंधों से नाराज़ यूएई ने उसके 2 अरब डॉलर के कर्ज की अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया है, जिससे इस्लामाबाद पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है.

uae refuses 2 billion dollar loan pakistan: सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के बीच बढ़ते तनाव का असर अब पाकिस्तान पर भी दिखने लगा है. पाकिस्तान ने खुलकर सऊदी अरब का समर्थन किया है और उसके साथ रक्षा समझौते भी किए हैं. पाकिस्तान सऊदी अरब को सैन्य मदद देने की तैयारी में है. यह नजदीकी यूएई को पसंद नहीं आई. इसी वजह से यूएई ने पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया है. यूएई ने पाकिस्तान के 2 अरब डॉलर के कर्ज की अवधि दो साल बढ़ाने से इनकार कर दिया है.
पाकिस्तानी सरकार ने कई बार समय बढ़ाने की गुजारिश की थी. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने राहत की उम्मीद की थी. लेकिन यूएई ने सख्त रुख अपनाया. उसने सिर्फ 17 अप्रैल तक का समय दिया है. पाकिस्तान के डिप्टी पीएम और विदेश मंत्री इशाक डार की बातचीत के बाद यह थोड़ी राहत मिली. हालांकि यह राहत सिर्फ कुछ समय के लिए ही है. इससे पाकिस्तान की आर्थिक चिंता और बढ़ गई है.
यूएई से राहत नहीं मिलने पर पाकिस्तान अब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की ओर देख रहा है. पाकिस्तान चाहता है कि आईएमएफ एक अरब डॉलर की अगली किश्त जारी करे. पाकिस्तान को आईएमएफ से कुल 7 अरब डॉलर का पैकेज मिलना है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यूएई ने लोन बढ़ाने से इनकार करने के साथ ही 6.5 फीसदी ब्याज भी वसूलने का फैसला किया है. जल्द ही इस पर औपचारिक मुहर लग सकती है.
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस पूरे मामले में यूएई से लगातार बातचीत की जा रही है. पहले यूएई ने इस लोन को सिर्फ एक महीने के लिए बढ़ाया था. इससे पाकिस्तान की आर्थिक हालत और तनाव में आ गई थी. पाकिस्तान ने दो साल की मोहलत मांगी थी, लेकिन उसे मंजूरी नहीं मिली. इससे सरकार पर विदेशी कर्ज चुकाने का दबाव बढ़ गया है.
पाकिस्तान पर इस समय कई देशों का कर्ज है. उसे यूएई को कुल 3 अरब डॉलर लौटाने हैं. इसके अलावा वह इस साल करीब 12 अरब डॉलर के विदेशी कर्ज को टालने की कोशिश कर रहा है. इसमें सऊदी अरब के 5 अरब डॉलर और चीन के 4 अरब डॉलर भी शामिल हैं. पाकिस्तान के नेता यूएई के दौरे कर रहे हैं, लेकिन वहां की सरकार अपना रुख नहीं बदल रही है. विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी अरब से पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी यूएई को पसंद नहीं आ रही. इसी कारण यूएई ने सख्त फैसला लिया है.
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