pm modi unhappy with ncert class 8 book: प्रधानमंत्री मोदी द्वारा एनसीईआरटी की कक्षा 8 की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार वाले अध्याय पर नाराजगी जताने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उक्त किताब पर प्रतिबंध लगा दिया है. अदालत ने इसे संस्था की छवि बिगाड़ने वाला प्रयास मानते हुए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.

pm modi unhappy with ncert class 8 book: केंद्र सरकार की हालिया कैबिनेट बैठक में स्कूल की किताब को लेकर बड़ा सवाल उठा है. बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कक्षा आठ की एक किताब के अध्याय पर नाराजगी जताई है. यह किताब राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद की है. अध्याय में न्यायपालिका से जुड़े कथित भ्रष्टाचार का ज़िक्र किया गया है. प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में पूछा कि इतनी छोटी उम्र के बच्चों को ऐसे विषय क्यों पढ़ाए जा रहे हैं. उनका मानना था कि यह विषय बच्चों की उम्र और समझ के अनुरूप नहीं है. बैठक में मौजूद अधिकारियों से इस पर जवाब भी मांगा गया. इसके बाद शिक्षा व्यवस्था और पाठ्यक्रम की दिशा को लेकर चर्चा तेज हो गई है.
सूत्रों के अनुसार बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि बच्चों को पढ़ाई के नाम पर हम किस तरह की सोच दे रहे हैं. उन्होंने यह भी जताया कि स्कूल की किताबों में ऐसे संवेदनशील मुद्दों को बहुत सोच समझकर शामिल किया जाना चाहिए. फिलहाल इस पूरे मामले पर सरकार की ओर से कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है. लेकिन राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में यह बहस शुरू हो गई है कि क्या आगे चलकर पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए नए दिशा निर्देश बनाए जाएंगे. सबकी नजर अब इस बात पर है कि सरकार इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है.
इस पूरे विवाद पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि जो कुछ हुआ वह दुखद है. न्यायपालिका का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था. उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिस टीम ने यह अध्याय तैयार किया है. उसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी. ज़रूरत पड़ी तो कार्रवाई भी होगी. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अदालतों और न्याय व्यवस्था का पूरा सम्मान करती है. अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा.
इस मामले में अब अदालत ने भी सख्त रुख अपनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की किताब Exploring Society India and Beyond Vol II के प्रकाशन. दोबारा छपाई और डिजिटल वितरण पर रोक लगा दी है. अदालत ने कहा कि किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से जुड़ी बातें संस्था की गरिमा को नुकसान पहुंचाती हैं. कोर्ट ने इसे गंभीर और आपत्तिजनक माना. अदालत का कहना है कि इस तरह की सामग्री से एक संवैधानिक संस्था की छवि पर असर पड़ता है.
इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की. इस पीठ में जॉयमाल्या बागची और विपुल एम पांचोली भी शामिल थे. अदालत ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा कि यह कदम संस्था की छवि को नुकसान पहुंचाने जैसा है. मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान कहा कि न्यायपालिका पर सीधा प्रहार हुआ है. अब यह पता लगाना जरूरी है कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है. जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.
