Delhi Water Crisis 2026: ‘द ट्रुथ 24’ की इस ग्राउंड रिपोर्ट में दिल्ली के संजय कैंप में जारी गंभीर जल संकट और उस पर हो रही राजनीति का पर्दाफाश किया गया है. रिपोर्ट में सामने आया है कि आम आदमी पार्टी के विधायक के इलाके में जनता आज भी बूंद-बूंद पानी, टैंकरों की कमी और गंदे पानी की समस्या से जूझने के साथ-साथ पानी चोरी करने को मजबूर है.
Delhi Water Crisis 2026: भीषण गर्मी और रिकॉर्ड तोड़ते पारे के बीच देश की राजधानी दिल्ली इस वक्त बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है. पानी के टैंकरों के पीछे भागती जनता, खाली बाल्टियां और त्राहि-त्राहि मचाते इलाके आज दिल्ली की कड़वी हकीकत बन चुके हैं. लेकिन इस बेकाबू होते जल संकट के बीच जो सबसे बड़ा सवाल हर दिल्लीवाले के जेहन में घूम रहा है, वो ये है कि क्या दिल्ली में सच में पानी की प्राकृतिक कमी है, या फिर यह संकट सियासी दलों की नूराकुश्ती और राजनीतिक साजिशों की देन है?
एक तरफ आम आदमी पार्टी लगातार बीजेपी सरकार पर नाकाम रहने और आंकड़ों को छुपाने का आरोप लगा रही है, तो दूसरी तरफ बीजेपी इसे पूरी तरह प्रशासनिक विफलता बता रही है. लेकिन इस गंदी राजनीति के पीछे का असली सच क्या है? क्या वाकई टैंकर माफिया और सियासी दल मिलकर जानबूझकर ये किल्लत करवा रहे हैं? इन सभी जलते हुए सवालों का सच तलाशने के लिए ‘द ट्रुथ 24’ की टीम ग्राउंड जीरो पर उतरी है. देखिए हमारी इस खोजी रिपोर्ट में कि दिल्ली की प्यास के पीछे छिपी असली ‘पॉलिटिक्स’ और जमीनी हकीकत क्या है.
जब दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार थी, तब भी पानी लेने के लिए अलग-अलग इलाकों में भारी भीड़ लग जाती थी. ये स्थिति आज भी बदली है या नहीं, इसी की पड़ताल करने के लिए हमारी टीम दिल्ली के संजय कैंप पहुंची. इस इलाके के वर्तमान विधायक आम आदमी पार्टी के वीरेंद्र सिंह कादियान हैं. वहां हमारे रिपोर्टर ने स्थानीय लोगों से बातचीत की, जहां सबसे पहले दो महिलाएं एक पाइप से पानी भरती हुई मिलीं.
जब उनसे पूछा गया कि अब तो यहां पानी की समस्या नहीं है ना? तो उन्होंने चिढ़कर कहा, “बहुत समस्या है… हमें तो पानी चोरी करके पीना पड़ता है.” इस पर हमारे रिपोर्टर ने मजाकिया अंदाज में पूछा कि सबके रहते हुए आप पानी की चोरी कर रही हैं? तो उन्होंने बताया कि वे क्या करें, जिस तरफ पानी आता है वहां के लोग उन्हें पानी लेने नहीं देते और वहां लड़ाई-झगड़ा होता है, इसलिए वे यहां से पानी ले रही हैं.
इतना ही नहीं, वहां पानी लेने के लिए बकायदा नंबर लगाना पड़ता है. उन्होंने बताया कि उनकी गली के लोग सिर्फ शाम 5 बजे तक ही वहां से पानी ले सकते हैं. उसके बाद उस नल पर वह व्यक्ति आ जाता है जिसका वह पाइप है, और वह गाली-गलौज करने लगता है. तब हमारे रिपोर्टर ने पूछा कि क्या बीजेपी की सरकार आने से भी कोई सुधार नहीं हुआ? तो उन्होंने कहा, “कुछ ठीक नहीं हुआ है.” फिर हमारे रिपोर्टर ने पूछा कि आपके विधायक कभी इलाके का हाल-चाल लेने आते हैं या नहीं, तो उन्होंने साफ मना कर दिया कि वे कभी नहीं आते हैं.
कुछ अन्य लोगों से बात करने पर पता चला कि वहां जो भूजल (जमीन का पानी) आ भी रहा है, वह खारा (नमकीन) है और उसमें गंदगी की मात्रा बहुत ज्यादा है. लोगों ने बताया कि यह पानी पीने से उन्हें गैस और पेट की समस्याएं हो जाती हैं. वहीं, पीने के पानी के जो टैंकर आते हैं, उनकी संख्या भी सिर्फ एक या दो होती है, जिसके कारण कुछ लोगों को पानी मिल पाता है और कुछ को खाली हाथ ही लौटना पड़ता है.
वहां मौजूद एक व्यक्ति से पूछने पर पता चला कि उसके परिवार में कुल 16 लोग हैं, और वे पीने के लिए बमुश्किल 40 से 50 लीटर पानी ही जुटा पाते हैं, जिससे उन्हें पूरा दिन चलाना पड़ता है. यह जमीनी हकीकत देखकर साफ पता चलता है कि दिल्ली में पानी की किल्लत दूर नहीं हुई है और लोग आज भी इस गंभीर समस्या को झेलने के लिए मजबूर हैं.

