छत्तीसगढ़ विधानसभा में धर्मांतरण को लेकर बिल पास किया गया है. धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 के अनुसार अवैध तरीके से छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण कराने वालों के खिलाफ में सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी. इनके लिए कैद की सजा भी निधार्रित की गई है. बता दें कि 20 मार्च दिन गुरुवार को छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा द्वारा छत्तीसगढ़ विधानसभा में इस बिल को पास किया गया था.
क्यों होगी सजा
अगर कोई व्यक्ति अवैध तरीके से धर्मांतरण करते हुए पाया जाता है. तो उस पर 7 से 10 साल तक की जेल साथ ही 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा.
नाबालिग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिला, आदिवासी वर्ग और पिछड़ा वर्ग के पीड़ित होने पर आरोपी को 10 से लेकर 20 लाख तक की सजा और 10 लाख तक जुर्माना भरना होगा. इसके अलावा सामूहिक धर्मातरण वाले को 10 साल की सजा और 25 लाख का जुर्माना लगेगा.
वहीं, जो व्यक्ति पहले ही धर्मांतरण कराने के मामले में अंदर जा कर सजा काट के आ चुका है और दोबारा से धर्म परिवर्तन कराने का दोषी पाया जाता है. तो उसको आजीवन कारावास की सजा कोर्ट में सुनाई जाएगी,
इसके अलावा अवैध धर्मांतरण कराने के लिए जो लोग मदद करेंगे, उनको महीनो से लेकर 3 साल तक की सजा सुनाई जाएगी. इसके अलावा 2 लाख रुपये जुर्माना भरवाया जाएगा.
अगर खुद से बदलना चाहते हैं तो धर्म क्या करना होगा?
अपनी इच्छा से धर्म बदलने वाले लोगों को सबसे पहले कलेक्टर को आवेदन देना होगा. यह आवेदन उन्हें 60 दिन पहले देना होगा. धर्म बदलने वाले के साथ-साथ मौलवी और पादरी पर यह नियम लागू है. उन्हें 7 दिन पहले कलेक्टर को आवेदन देना होगा. अगर नहीं दिया गया तो यह वैध माना जाएगा और तुरंत उसकी गिरफ्तारी की जाएगी.
क्यों किया यह बिल पास
दरअसल, यह बिल इसलिए पास किया गया हैं क्योंकि साल 1968 में बना धर्मांतरण कानून वर्तमान की सामाजिक परिस्थितियों के में नाकाम साबित हो रहा था. छत्तीसगढ़ में तेजी से हो रहे धर्मांतरण के मामलों को रोकने के लिए बिल पास किया गया है. बलपूर्वक या लालच देकर धर्मातरण कराने वाले मामलों को रोकने के लिए किया गया बिल पास.
