supreme court hearing i-pac: सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल में I-PAC दफ्तर पर ED की छापेमारी के मामले में सुनवाई करते हुए अधिकारियों के मौलिक अधिकारों की रक्षा की बात कही है. ₹2,742 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े इस मामले में कोर्ट ने राज्य सरकार की दलीलों पर सवाल उठाते हुए जांच की निष्पक्षता पर जोर दिया है.

supreme court hearing i-pac: सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल में I-PAC के ऑफिस पर हुई ED की रेड को लेकर सुनवाई हुई. कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार से कई अहम सवाल पूछे. जजों ने पूछा कि अगर केंद्र में आपकी सरकार होती और कोई राज्य ऐसी कार्रवाई करता, तो आप क्या करते. कोर्ट ने यह भी कहा कि ड्यूटी पर मौजूद ED अधिकारी अपने अधिकार नहीं खोते हैं. इस दौरान यह भी सामने आया कि कुछ ED अधिकारियों ने निजी तौर पर भी याचिका दायर की है.
राज्य सरकार की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि ED के पास पहले से ही दूसरे कानूनी रास्ते मौजूद हैं. इसलिए उसे सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका नहीं देनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि जांच करना किसी अधिकारी का मौलिक अधिकार नहीं होता. यह सिर्फ कानून से मिला अधिकार है. अगर हर अधिकारी इस आधार पर कोर्ट जाने लगेगा, तो व्यवस्था पर असर पड़ेगा.
इस पर कोर्ट ने साफ कहा कि अधिकारियों के भी मौलिक अधिकार होते हैं. सिर्फ यह कहकर उनकी बात नहीं टाली जा सकती कि वे सरकारी अधिकारी हैं. जजों ने कहा कि इन याचिकाओं को गंभीरता से देखना जरूरी है. कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं और मामले को विस्तार से समझने की बात कही.
पूरा मामला जनवरी की एक कार्रवाई से जुड़ा है. 8 जनवरी को ED ने कोलकाता में I-PAC के दफ्तर और उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन के घर पर छापा मारा था. यह कार्रवाई सुबह शुरू हुई थी. बाद में मामला बढ़ गया, जब पुलिस और राज्य के बड़े अधिकारी वहां पहुंचे. कुछ समय बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी मौके पर पहुंचीं. उन्होंने वहां से कुछ फाइलें लीं और केंद्र सरकार पर आरोप लगाए.
यह केस करीब 2,742 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा बताया जा रहा है. आरोप है कि कुछ पैसे हवाला के जरिए I-PAC तक पहुंचे थे. इस मामले की जांच पहले CBI ने शुरू की थी, फिर ED ने भी जांच संभाली. राज्य की पार्टी का कहना है कि यह कार्रवाई चुनाव से पहले की गई, ताकि उनकी रणनीति को नुकसान पहुंचाया जा सके. वहीं पुलिस ने ED अधिकारियों के खिलाफ FIR भी दर्ज की है. अब इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई आगे भी जारी रहेगी.
