petrol diesel shortage rumors india: भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि मध्य पूर्व में तनाव के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है और हमारे पास 60 दिनों का पर्याप्त तेल भंडार मौजूद है. अधिकारियों ने जनता से अफवाहों पर ध्यान न देने और पैनिक बाइंग से बचने की अपील करते हुए बताया कि पेट्रोलियम एक्ट के तहत भारी मात्रा में ईंधन जमा करना गैरकानूनी है.

petrol diesel shortage rumors india: मध्य पूर्व में चल रहे तनाव का असर अब दुनिया के कई देशों में दिखने लगा है. युद्ध को तीन हफ्ते से ज्यादा समय हो चुका है और हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं. इसी वजह से पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस को लेकर कई तरह की खबरें सामने आ रही हैं. भारत के कुछ शहरों में लोगों ने घबराकर पेट्रोल और डीजल ज्यादा मात्रा में खरीदना शुरू कर दिया है. कई पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें भी देखने को मिल रही हैं. लोग अपने वाहन की टंकी फुल करा रहे हैं ताकि जरूरत पड़ने पर परेशानी न हो.
हालांकि सरकार ने साफ कहा है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है. अधिकारियों के अनुसार भारत के पास लगभग 60 दिनों के लिए कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का पर्याप्त भंडार मौजूद है. सरकार लगातार अपने रणनीतिक भंडार को मजबूत करने में लगी है. इसी रणनीति के तहत Strategic Petroleum Reserves को बढ़ाया जा रहा है. इसके अलावा अफ्रीका और रूस जैसे देशों से भी अधिक मात्रा में कच्चा तेल आयात किया जा रहा है ताकि सप्लाई में कोई रुकावट न आए.
देश में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए रिफाइनरियों को भी पूरी क्षमता पर चलाया जा रहा है. इसके बावजूद कुछ जगहों पर अफवाहों की वजह से लोग जरूरत से ज्यादा पेट्रोल और डीजल खरीद रहे हैं. सरकार ने लोगों से अपील की है कि घबराने की जरूरत नहीं है. जितनी जरूरत हो उतना ही ईंधन अपने वाहन में भरवाएं. घर में बड़ी मात्रा में पेट्रोल या डीजल जमा करना न केवल खतरनाक है बल्कि कानूनन गलत भी माना जाता है.
जहां तक एक व्यक्ति द्वारा पेट्रोल या डीजल खरीदने की बात है, तो वाहन की टंकी में तेल भरवाने की कोई सीमा तय नहीं है. कोई भी व्यक्ति अपने वाहन में जरूरत के अनुसार ईंधन भरवा सकता है. लेकिन अगर अलग से कैन या कंटेनर में पेट्रोल लेना हो तो आमतौर पर 2 से 5 लीटर तक ही दिया जाता है. कुछ पेट्रोल पंप जरूरत के हिसाब से 5 से 10 लीटर तक भी दे सकते हैं. हालांकि यह ईंधन सामान्य प्लास्टिक की बोतल में नहीं दिया जाता. इसके लिए स्टील या मजबूत प्लास्टिक का स्वीकृत कंटेनर होना जरूरी होता है.
अगर किसी को 20, 50 या 200 लीटर जैसे बड़े ड्रम में पेट्रोल या डीजल चाहिए तो इसके लिए विशेष अनुमति लेनी पड़ती है. इसके नियम Petroleum Act 1934 के तहत तय किए गए हैं. ग्राहक को यह बताना होता है कि इतना ईंधन किस काम के लिए लिया जा रहा है, जैसे जेनरेटर, खेती या किसी औद्योगिक उपयोग के लिए. साथ ही यह भी जानकारी देनी पड़ती है कि इसे कहां और कैसे सुरक्षित तरीके से रखा जाएगा. भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है. इसलिए सरकार वैकल्पिक ऊर्जा और पीएनजी जैसी योजनाओं पर भी तेजी से काम कर रही है ताकि भविष्य में तेल पर निर्भरता कम हो सके.
