crude oil impact on india market: विदेशी ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने चेतावनी दी है कि यदि वैश्विक संघर्ष 2026 तक जारी रहा, तो कच्चे तेल की कीमतों के कारण निफ्टी 19,000 के नीचे और रुपया 110 प्रति डॉलर के स्तर तक गिर सकता है. इस मंदी की स्थिति में भारत को दहाई अंकों की महंगाई, रेपो रेट में बढ़ोतरी और आर्थिक विकास दर में भारी गिरावट का सामना करना पड़ सकता है.

crude oil impact on india market: हाल ही में शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली थी. लेकिन पिछले दो दिनों से बाजार में थोड़ी रिकवरी नजर आई है. इसी बीच एक बड़े एक्सपर्ट ने निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी है. उनका कहना है कि हालात बिगड़ने पर निफ्टी 19000 के नीचे भी जा सकता है. साथ ही रुपये में भी बड़ी गिरावट आ सकती है और यह 110 के स्तर तक पहुंच सकता है. यह संकेत बाजार के लिए चिंता बढ़ाने वाले हैं.
विदेशी ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने भी बाजार को लेकर नया आकलन पेश किया है. फर्म ने इस साल के लिए निफ्टी का टारगेट घटाकर 26000 कर दिया है. पहले यह टारगेट इससे ज्यादा था. उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें बाजार पर बड़ा असर डालती हैं. 2014 से 2021 के बीच बहुत कम समय ऐसा था जब तेल 80 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहा. लेकिन हालात अब बदल गए हैं.
रूस-यूक्रेन युद्ध के समय भी तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर से ऊपर रहीं. बाद में 2023 की शुरुआत में यह गिरकर 80 डॉलर से नीचे आईं. इससे यह साफ होता है कि भारत जैसे देश बाहरी झटकों से ज्यादा प्रभावित होते हैं. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है. इसलिए तेल महंगा होते ही अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ जाता है.
ब्रोकरेज फर्म ने चेतावनी दी है कि अगर 2026 तक वैश्विक तनाव जारी रहता है तो स्थिति और खराब हो सकती है. महंगाई डबल डिजिट में जा सकती है. आर्थिक विकास दर 2 से 3 प्रतिशत तक सीमित हो सकती है. रुपया 110 के पार जा सकता है. वहीं निफ्टी 19000 से नीचे फिसल सकता है. ऐसे हालात में रिजर्व बैंक ब्याज दर बढ़ा सकता है. इससे लोन महंगे होंगे और मांग पर असर पड़ेगा.
फर्म का कहना है कि भले ही युद्ध खत्म हो जाए, लेकिन भारत के लिए चुनौतियां बनी रहेंगी. तेल की ऊंची कीमतें और कमजोर घरेलू सपोर्ट चिंता का कारण हैं. हालांकि उनका बेस केस अब भी 26000 का टारगेट दिखाता है. इसका मतलब मौजूदा स्तर से कुछ बढ़त की उम्मीद है. लेकिन जोखिम अभी भी काफी ज्यादा है. इसलिए निवेशकों को सतर्क रहकर ही फैसले लेने चाहिए.
