टीएचडीसी की पीपलकोटी-विष्णुगाड जल विद्युत परियोजना की टनल में हुए हादसे में घायल एक और श्रमिक की मौत हो गई है.हादसे में अब मृतकों की संख्या 11 हो गई है.
Pipalkoti Tunnel Accident: उत्तराखंड के चमोली के पीपलकोटी में THDC की निर्माणाधीन सुरंग में 13 अगस्त को हुए हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है. हादसे के बाद छह दिनों तक चले सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन को मंगलवार, 18 अगस्त को समाप्त कर दिया गया. अभियान के अंतिम दिन राहत और बचाव टीमों ने सुरंग के अंदर से दो और श्रमिकों के शव बरामद किए. इसके साथ ही इस हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है. हादसा, 13 अगस्त की शाम करीब 6:30 बजे निर्माणाधीन टनल के करीब डेढ़ किलोमीटर अंदर हुआ था.
जानें क्या है मामला ?
हादसे के पहले ही दिन सुरंग में फंसे 12 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था. सभी को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया. इलाज के दौरान एक श्रमिक की मौत हो गई. वहीं, प्राथमिक उपचार के बाद दो घायल श्रमिकों को अस्पताल से छुट्टी भी दे दी गई है. इस पूरे अभियान में SDRF, NDRF और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार जुटी रहीं. मुश्किल हालात के बावजूद बचाव दल ने दिन-रात काम कर फंसे मजदूरों को बाहर निकालने और सुरंग में मौजूद श्रमिकों की तलाश का प्रयास किया.
पांच लाख के मुआवजे पर भड़का लोगों का गुस्सा
हादसे के बाद THDC प्रबंधन ने मृतक श्रमिकों के परिवारों को पांच-पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का ऐलान किया. लेकिन मुआवजे की रकम सामने आते ही स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और साथी मजदूरों में नाराजगी फैल गई. लोगों का कहना है कि किसी परिवार के सदस्य की जान जाने के बाद पांच लाख रुपये की सहायता बेहद कम है.
टनल परिसर के बाहर मुआवजे को लेकर लोगों ने विरोध जताया. इस दौरान स्थानीय लोगों और कंपनी के सुरक्षाकर्मियों के बीच तीखी बहस और नोकझोंक भी हुई. प्रदर्शन कर रहे लोगों की मांग है कि हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों के परिवारों को ऐसी आर्थिक मदद दी जाए, जिससे वे आगे की जिंदगी सम्मान के साथ गुजार सकें.
मजदूरों की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस हादसे ने पहाड़ी इलाकों में चल रही बड़ी निर्माण परियोजनाओं में मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों और मजदूर संगठनों का आरोप है कि सुरंग में काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे. उनका कहना है कि अगर सुरंग के अंदर सुरक्षा के जरूरी मानक, आपातकालीन रास्ते और बचाव की पर्याप्त व्यवस्था होती तो शायद कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी.
हालांकि, इन आरोपों की पूरी सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगी. हादसे की जांच में यह पता लगाना जरूरी होगा कि दुर्घटना की असली वजह क्या थी और निर्माण के दौरान सुरक्षा नियमों का कितना पालन किया जा रहा था.
पहले दिन चार श्रमिकों के शव मिले, जबकि 14 अगस्त को तीन अन्य शव मिले. 15 अगस्त को एक और श्रमिक का शव मिला था. मंगलवार को सुबह एक शव और दोपहर में दूसरा शव भी मिल गया.
