CJP Rebellion: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) में बगावत के बाद मनीष ब्रह्मभट्ट ने अलग होकर CJP-डेमोक्रेटिक बनाई और संस्थापक अभिजीत दिपके पर पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप लगाया.

CJP Rebellion: अभिजीत दिपके के नेतृत्व वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) में पहली बार बड़ी बगावत देखने को मिली है. संगठन के पुराने स्वयंसेवक रहे मनीष ब्रह्मभट्ट ने CJP से अलग होकर एक नया गुट बना लिया है. उन्होंने अपनी नई पार्टी का नाम ‘कॉकरोच जनता पार्टी-डेमोक्रेटिक’ (CJP-D) रखा है. पार्टी अलग करने के साथ ही ब्रह्मभट्ट ने संस्थापक अभिजीत दिपके पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि जिस आंदोलन की शुरुआत युवाओं के हक की लड़ाई से हुई थी, वह अब कुछ चुनिंदा लोगों का अड्डा बन चुका है.
पुराने कार्यकर्ताओं को दरकिनार करने का आरोप
मनीष ब्रह्मभट्ट का कहना है कि जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन से जुड़े पुराने साथियों की अनदेखी की जा रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि CJP अब आम आदमी पार्टी (AAP) के नक्शेकदम पर चल रही है. उन्होंने दावा किया कि CJP की मुख्य टीम में शामिल कम से कम आठ लोगों के तार आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे हैं. ब्रह्मभट्ट के मुताबिक संगठन अब छात्रों और युवाओं के असली मुद्दों को छोड़कर सिर्फ बीजेपी का विरोध करने में जुटा है. हालांकि दिपके या उनकी पार्टी की ओर से इन आरोपों पर अब तक कोई अधिकारिक जवाब नहीं आया है.
दिपके के घर के बाहर हुआ था हंगामा
CJP के अंदर विवाद की पटकथा अगस्त के महीने से ही लिखी जा रही थी. ब्रह्मभट्ट गुजरात से छत्रपति संभाजीनगर पहुंचे थे, जहाँ उन्हें खबर मिली कि अभिजीत दिपके अपने घर पर पार्टी की गुप्त बैठक कर रहे हैं. इसके बाद ब्रह्मभट्ट और उनके साथी राहुल पांड्या ने दिपके के घर के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन किया. उनका आरोप था कि आंदोलन खड़ा करने वाले पुराने कार्यकर्ताओं को इस बैठक में नहीं बुलाया गया. प्रदर्शन के दौरान दोनों नेताओं की तबीयत भी बिगड़ गई थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था.
राष्ट्रीय टीम के गठन पर उठाए सवाल
गुरुवार को दिल्ली में नई पार्टी का ऐलान करते हुए ब्रह्मभट्ट ने CJP की राष्ट्रीय कार्यसमिति के गठन पर बड़े सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि इस आंदोलन को खड़ा करने में देश के अलग-अलग राज्यों के युवाओं का पसीना लगा है. इसलिए संगठन में सभी राज्यों को बराबरी का हक मिलना चाहिए था. आरोप है कि अगस्त में बनी राष्ट्रीय टीम में सिर्फ अभिजीत दिपके के चहेते लोगों को जगह दी गई. इस टीम में दिपके को खुद राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया, जबकि बाकी राज्यों के पुराने साथियों से कोई सलाह तक नहीं ली गई.
पुराने राजनीतिक संबंधों पर गर्माई सियासत
अभिजीत दिपके का पुराना जुड़ाव आम आदमी पार्टी से रहा है और उन्होंने खुद भी इस बात को माना है. हालांकि उनका कहना है कि अब उनका आप से कोई लेना-देना नहीं है. लेकिन जंतर-मंतर पर हुए CJP के प्रदर्शन के दौरान अरविंद केजरीवाल और आप के कई दिग्गज नेता दिपके के साथ मंच साझा करते हुए दिखे थे. इसी बात को लेकर संगठन के भीतर लगातार सवाल उठते रहे हैं. बगावत करने वाले गुट का मानना है कि पार्टी पूरी तरह से किसी एक राजनीतिक विचारधारा के इशारे पर चलाई जा रही है.
भविष्य की राह और नई चुनौती
अब CJP-D के बनने के बाद युवाओं के इस आंदोलन में दोफाड़ होना तय माना जा रहा है. ब्रह्मभट्ट ने साफ कर दिया है कि वे अब अपनी नई पार्टी के जरिए ही असली मुद्दों को उठाएंगे और निष्ठावान कार्यकर्ताओं को आगे लाएंगे. वहीं दूसरी तरफ CJP के लिए अपने पुराने कार्यकर्ताओं को एक साथ जोड़े रखना बड़ी चुनौती बन गया है. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह आपसी बगावत किस मोड़ पर पहुंचती है और दोनों गुट अपनी राजनीति को किस तरह आगे बढ़ाते हैं.
