Delhi missing case: दिल्ली में 2026 के पहले 15 दिनों में 807 लोगों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज हुई है, यानी रोज औसतन 54 मामले, लेकिन यह संख्या पिछले सालों से ज्यादा नहीं है.

Delhi missing case: दिल्ली में इन दिनों बच्चों और महिलाओं के गायब होने को लेकर सोशल मीडिया पर काफी डर और भ्रम फैल गया है. हर जगह यही कहा जा रहा है कि राजधानी में रोज दर्जनों लोग लापता हो रहे हैं. सच यह है कि दिल्ली में साल 2026 के पहले 15 दिनों में कुल 807 लोगों के गुम होने की रिपोर्ट दर्ज हुई है. यानी औसतन हर दिन करीब 54 लोग लापता बताए गए हैं. यह आंकड़ा खुद दिल्ली पुलिस के रिकॉर्ड से लिया गया है. यह संख्या चिंता जरूर बढ़ाती है. लेकिन यह भी समझना जरूरी है कि दिल्ली करीब दो करोड़ की आबादी वाला बहुत बड़ा शहर है. पिछले कुछ सालों के मुकाबले इसमें कोई अचानक तेज बढ़ोतरी नहीं दिखती. उल्टा पुराने आंकड़ों से तुलना करें तो पहले रोज करीब 65 से 68 लोग लापता होते थे.
गुम होने वालों में महिलाओं की संख्या ज्यादा रहती है. यही स्थिति इस साल भी देखी गई है. 15 जनवरी तक दर्ज 807 मामलों में से 509 महिलाएं थीं. जबकि 298 पुरुष लापता बताए गए. बीते पांच साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो करीब 60 प्रतिशत गुमशुदा लोग महिलाएं ही रही हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि हर मामला अपराध से जुड़ा होता है. कई मामलों में घरेलू कारण. पारिवारिक तनाव. या आपसी विवाद भी सामने आते हैं. फिर भी महिलाओं के मामले ज्यादा होना पुलिस और समाज दोनों के लिए चिंता की बात है.
अगर उम्र की बात करें तो सबसे ज्यादा गुमशुदगी के मामले 12 से 18 साल के बच्चों से जुड़े होते हैं. हर साल यही ट्रेंड देखने को मिलता है. कुछ मामलों में अपहरण और फिरौती जैसे गंभीर अपराध भी होते हैं. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी संख्या में बच्चे दोस्तों के साथ बिना बताए चले जाते हैं. कई बार पढ़ाई का दबाव होता है. घर में डांट या किसी बात को लेकर नाराजगी होती है. इसी वजह से वे घर छोड़ देते हैं. इसलिए हर केस को एक जैसा नहीं माना जा सकता.
राहत की बात यह है कि ज्यादातर गुमशुदा लोगों का पता चल जाता है. पुलिस या परिवार उन्हें ढूंढ लेते हैं. या फिर कई लोग खुद ही वापस घर लौट आते हैं. साल 2021 से 2025 के बीच दिल्ली में 12 से 18 साल की उम्र के करीब साढ़े पच्चीस हजार बच्चों के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज हुई थी. इनमें से लगभग साढ़े इक्कीस हजार बच्चे मिल गए. हालांकि करीब चार हजार बच्चों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है. यह एक गंभीर और दुखद स्थिति भी है.

हाल के दिनों में यह भी कहा जा रहा है कि लापता लोगों की खबरों का संबंध फिल्म मर्दानी-3 के प्रचार से हो सकता है. इसकी वजह यह है कि फिल्म की कहानी भी गुमशुदा बच्चों पर आधारित है और उसी समय ये खबरें वायरल होने लगीं. हालांकि फिल्म बनाने वाली कंपनी ने साफ कहा है कि इन खबरों से उनका कोई संबंध नहीं है. उन्होंने ऐसे आरोपों को गलत बताया है. फिलहाल इतना साफ है कि आंकड़े सही हैं. लेकिन डर फैलाने वाली बातें पूरी सच्चाई नहीं दिखातीं.
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