India will not stop buying russian oil: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के दावे पर भारत ने साफ किया है कि रूस से तेल खरीद रोकने का कोई फैसला नहीं हुआ है और ऊर्जा नीति देश की जरूरतों व बाजार हालात से तय होती है. भारत ने दोहराया है कि वह किसी दबाव में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही तेल आयात से जुड़े फैसले करता है.

India will not stop buying russian oil: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार बातचीत के बाद अब ट्रेड डील को लेकर सहमति बन गई है. अमेरिका ने भारत पर लगाए गए आयात शुल्क को घटाकर 18 प्रतिशत करने की बात कही है. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह दावा किया कि भारत अब रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद कर देगा. उन्होंने यह भी कहा कि भारत आगे चलकर अमेरिका या वेनेजुएला से ज्यादा तेल खरीदेगा. इस बयान के बाद भारत में यह सवाल उठने लगा कि क्या सरकार वाकई रूस से तेल लेना बंद करने जा रही है. अब इस पूरे मामले पर भारत के विदेश मंत्रालय ने साफ और संतुलित जवाब दिया है. सरकार ने साफ किया है कि देश की ऊर्जा जरूरतों से जुड़े फैसले किसी बयान के आधार पर नहीं लिए जाते.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत के लिए 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है. इसी सोच के साथ भारत अलग अलग देशों से कच्चा तेल खरीदता है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि भारत की ऊर्जा नीति किसी राजनीतिक बयानबाजी या किसी बाहरी दबाव से तय नहीं होती. यह नीति देश की जरूरतों और बाजार की वास्तविक स्थिति को देखकर बनाई जाती है. उन्होंने यह भी बताया कि भारत हमेशा से अपने लिए सुरक्षित और भरोसेमंद सप्लाई पर ध्यान देता रहा है. इसलिए भारत किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहता.
विदेश मंत्रालय ने वेनेजुएला को लेकर भी स्थिति साफ की. प्रवक्ता ने बताया कि वेनेजुएला भारत का पुराना ऊर्जा साझेदार रहा है. भारत ने साल 2019-20 तक वेनेजुएला से तेल आयात किया था. बाद में अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण यह खरीद बंद करनी पड़ी. इसके बाद 2023-24 में भारत ने दोबारा वेनेजुएला से तेल खरीद शुरू की. लेकिन जब फिर से प्रतिबंध लगाए गए, तो यह सप्लाई दोबारा रुक गई. सरकार ने बताया कि ऐसे मामलों में भारत हमेशा अंतरराष्ट्रीय नियमों और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही फैसले करता है.
सरकार ने यह भी साफ कर दिया कि रूस से तेल खरीद को लेकर अभी कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है. न तो रूस से तेल खरीद बंद करने की कोई पुष्टि की गई है. न ही किसी नए देश से खरीद को लेकर कोई विशेष घोषणा की गई है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत तेल आयात से जुड़े सभी फैसले पूरी तरह व्यावसायिक आधार पर करता है. इसमें तेल की उपलब्धता. कीमत. सप्लाई की स्थिरता और देश के राष्ट्रीय हित को सबसे ऊपर रखा जाता है. किसी एक देश को लेकर कोई तय नीति नहीं बनाई जाती.

यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका भारत से रूसी तेल की खरीद कम करने की बात कर रहा है. अमेरिका चाहता है कि भारत वैकल्पिक तौर पर अमेरिका और वेनेजुएला से तेल खरीदे. हालांकि भारत ने दोहराया है कि वह सभी विकल्पों को खुले मन से देखता है. लेकिन किसी भी स्थिति में देश की ऊर्जा सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा. सरकार ने साफ कर दिया है कि भारत अपनी विदेश नीति और ऊर्जा नीति खुद तय करता है. रूस हो. अमेरिका हो या वेनेजुएला. भारत का फोकस केवल देश की जरूरतें पूरी करने और आर्थिक रूप से संतुलित फैसले लेने पर रहेगा.
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