corporate workplace harassment cases report: टीसीएस नासिक की घटना के बीच सामने आए आंकड़ों के अनुसार, भारत की लिस्टेड कंपनियों में कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के मामले 2022 की तुलना में 2024 में बढ़कर 2,777 हो गए हैं। लंबित शिकायतों की बढ़ती संख्या, विशेष रूप से आईटी और फाइनेंशियल सेक्टर्स में, कॉर्पोरेट सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है.

corporate workplace harassment cases report: Tata Consultancy Services के Nashik स्थित बीपीओ कैंपस में महिलाओं के साथ हुए अभद्र व्यवहार की घटना के बाद कॉरपोरेट दफ्तरों में होने वाले उत्पीड़न पर फिर से बहस शुरू हो गई है. इस घटना ने दिखाया है कि समस्या सिर्फ एक कंपनी तक सीमित नहीं है. कई जगहों पर कार्यस्थल का माहौल अब भी सुरक्षित नहीं माना जाता. ऑफिस के अंदर होने वाला उत्पीड़न अब कोई दुर्लभ घटना नहीं रहा. कई कर्मचारी ऐसी स्थितियों का सामना करते हैं, लेकिन कई बार ये बातें खुलकर सामने नहीं आ पातीं.
कार्यस्थल पर सबसे ज्यादा असर महिलाओं पर पड़ता है. कई रिपोर्ट में बताया गया है कि अब पहले की तुलना में अधिक महिलाएं आगे आकर शिकायत दर्ज करा रही हैं. लेकिन एक बड़ी समस्या यह है कि शिकायतों का निपटारा उसी तेजी से नहीं हो पा रहा. इससे कई मामलों में लंबा इंतजार करना पड़ता है. रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियों में दर्ज मामलों की संख्या तो बढ़ रही है, लेकिन कई केस लंबे समय तक लंबित भी रह जाते हैं.
Forbes India ने Primeinfobase के आंकड़ों के आधार पर बताया था कि वर्कप्लेस पर उत्पीड़न के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. आंकड़ों के अनुसार भारत की लिस्टेड कंपनियों में साल 2024 में यौन उत्पीड़न की कुल शिकायतें बढ़कर 2,777 हो गईं. साल 2023 में यह संख्या 2,026 थी. इससे पहले 2022 में केवल 1,313 शिकायतें दर्ज हुई थीं. इन आंकड़ों से साफ है कि हर साल मामलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है.
लंबित मामलों की संख्या भी चिंता बढ़ाने वाली है. साल 2022 में जहां ऐसे 174 केस पेंडिंग थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 455 तक पहुंच गई. इसी तरह National Stock Exchange की एनएसई 500 कंपनियों में पेंडिंग केस 162 से बढ़कर 428 हो गए. रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा लंबित मामले फाइनेंशियल कंपनियों में देखे गए हैं. इसके बाद आईटी सेक्टर का नंबर आता है.
आईटी इंडस्ट्री में बड़ी संख्या में महिलाएं काम करती हैं. अनुमान है कि इस क्षेत्र में करीब 20 लाख से ज्यादा महिलाएं कार्यरत हैं. यह कुल वर्कफोर्स का एक तिहाई से अधिक हिस्सा है. इसलिए यह जरूरी है कि कंपनियां सुरक्षित कार्यस्थल बनाने पर खास ध्यान दें. साथ ही हर कंपनी में शिकायत दर्ज करने और उसका समाधान करने के लिए मजबूत व्यवस्था होनी चाहिए. सभी शहरों में सक्रिय आंतरिक समितियां बनाना भी जरूरी माना जा रहा है. ताकि कर्मचारी बिना डर अपनी बात रख सकें और समय पर न्याय मिल सके.
