Sahil Lochab Delhi Police FIR: इस खबर में जानिए जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन से घायल हुए छात्र साहिल लोचब द्वारा दिल्ली पुलिस पर लगाए गए गंभीर आरोपों और दर्ज हुई एफआईआर का पूरा सच.

Sahil Lochab Delhi Police FIR: दिल्ली के संसद मार्ग थाने में करीब 6 घंटे चले लंबे हंगामे के बाद आखिरकार पुलिस ने पीड़ित छात्र साहिल लोचब की शिकायत पर एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है. राहुल गांधी खुद पीड़ित छात्र और उसकी मां के साथ थाने पहुंचे थे और रसीद न मिलने पर धरने पर बैठ गए थे. पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 118 और 125 के तहत केस दर्ज किया है. साहिल का आरोप है कि 20 जुलाई को छात्रों के प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाबलों ने उस पर पैलेट गन से फायरिंग की थी, जिसमें उसकी एक आंख की रोशनी चली गई और शरीर में 200 से ज्यादा छर्रे घुस गए.
दाहिनी आंख की रोशनी खत्म और शरीर में सैकड़ों छर्रे
साहिल ने अपनी लिखित शिकायत में बताया कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाबलों ने उस पर 5 से 6 बार पैलेट गन से फायर किया. डॉक्टरों का कहना है कि हमले के कारण उसकी दाहिनी आंख की रोशनी 1% से भी कम बची है. एम्स (AIIMS) के सीटी स्कैन में उसके चेहरे, गर्दन, जबड़े और आंख के सॉकेट में 200 से अधिक धातु के छर्रे पाए गए हैं. ये छर्रे नसों के बेहद करीब हैं, इसलिए डॉक्टर इन्हें बाहर नहीं निकाल पा रहे हैं. एम्स के मेडिकल रिकॉर्ड में भी साफ लिखा गया है कि ये सभी चोटें पैलेट गन के छर्रों की वजह से ही आई हैं.
टूट गया पुलिस में भर्ती होने का सपना
पीड़ित साहिल का सपना दिल्ली पुलिस में भर्ती होकर देश की सेवा करना था, लेकिन इस हादसे के बाद उसका करियर पूरी तरह खत्म हो गया है. अब वह शारीरिक रूप से पुलिस सेवा के अयोग्य हो गया है. साहिल अपने परिवार का इकलौता बड़ा सहारा था और उसके पिता खुद दिव्यांग हैं. शिकायत में उसने कहा कि इस घटना ने न सिर्फ उसके शरीर को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि उसके पूरे परिवार का भविष्य भी अंधकार में ढकेल दिया है.
थाने के चक्कर और शिकायत की रिसीविंग से इनकार
साहिल की मां और वकील जब 14 अगस्त को शिकायत दर्ज कराने कनॉट प्लेस थाने पहुंचे, तो पुलिसकर्मियों ने केस क्राइम ब्रांच का बताकर रसीद देने से मना कर दिया. इसके बाद उन्हें संसद मार्ग थाने और आर.के. पुरम क्राइम ब्रांच के चक्कर कटवाए गए. 17 अगस्त को फोन और ईमेल भेजने के बाद भी पुलिस ने न तो शिकायत दर्ज की और न ही कोई रिसीविंग दी. आखिरकार 21 अगस्त को राहुल गांधी के दखल और 6 घंटे के धरने के बाद पुलिस को मामला दर्ज करना पड़ा.
फुटेज और सबूतों को सुरक्षित करने की मांग
अपनी शिकायत में साहिल ने मांग की है कि 20 जुलाई के दिन जंतर-मंतर, कनॉट प्लेस और राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के सभी सीसीटीवी कैमरे तुरंत खंगाले जाएं. इसके अलावा मौके पर मौजूद सुरक्षाबलों के बॉडी वॉर्न कैमरे और ड्रोन रिकॉर्डिंग को तुरंत जब्त किया जाए. साहिल का कहना है कि अगर इन सबूतों को समय रहते सुरक्षित नहीं किया गया, तो साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ या उन्हें नष्ट किया जा सकता है.
गोली चलाने वालों की पहचान और जांच की अपील
शिकायत के अंत में मांग की गई है कि घटना वाले दिन जंतर-मंतर पर तैनात सभी पुलिसकर्मियों और सुरक्षाबलों की ड्यूटी लिस्ट तलब की जाए. इससे यह साफ हो सकेगा कि गोली चलाने का आदेश किसने दिया था और फायरिंग किसने की थी. इसके साथ ही साहिल ने मांग की है कि इलाज के दौरान उसके शरीर से निकाले जाने वाले छर्रों को बिना किसी देरी के फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) जांच के लिए भेजा जाए, ताकि सच सामने आ सके.
नीट पेपर लीक प्रदर्शन से शुरू हुआ था बवाल
यह पूरा मामला 20 जुलाई का है, जब छात्र नीट (NEET) पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में धांधली के खिलाफ जंतर-मंतर से संसद की ओर मार्च निकाल रहे थे. इस प्रदर्शन का नेतृत्व कांग्रेस जनता पार्टी (CJP) कर रही थी. मार्च के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की और तीखी झड़प हो गई. भीड़ को हटाने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया और पैलेट गन चलाई, जिसमें 19 साल का छात्र साहिल बुरी तरह घायल हो गया था.
