Power Cut in Haryana: हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल के कारण गुरुग्राम, सोनीपत और नूंह समेत कई इलाकों में बिजली गुल है। जानिए क्या है पूरा मामला और सरकार की प्रतिक्रिया.

Power Cut in Haryana: हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल के कारण जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है. राज्य की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले गुरुग्राम समेत कई जिलों में बिजली गुल होने से भारी संकट खड़ा हो गया है. कई रिहायशी इलाकों के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्रों में भी कामकाज ठप पड़ा है. बिजली न होने के कारण लोगों को भीषण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. हालात को देखते हुए कई जगहों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और सब-स्टेशनों पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है.
गुरुग्राम और औद्योगिक इलाकों में कामकाज ठप
बिजली कर्मचारियों की इस बेमियादी हड़ताल का सबसे बुरा असर गुरुग्राम में देखने को मिल रहा है. शहर के कई सेक्टरों में घंटों से बत्ती गुल है और लोग अंधेरे में रहने को मजबूर हैं. दौलताबाद, कादीपुर और सेक्टर 37 जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में फैक्ट्रियों का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है. बिजली कब आएगी, इसका कोई पुख्ता जवाब देने वाला अधिकारी फिलहाल मौके पर मौजूद नहीं है. गुस्से से परेशान आम लोग सड़कों पर उतरकर अपना विरोध जता रहे हैं.
सोनीपत और नूंह में भी गहराया ब्लैकआउट
बिजली संकट का यह असर सिर्फ गुरुग्राम तक सीमित नहीं है, बल्कि सोनीपत और नूंह में भी बुरे हाल हैं. सोनीपत के गन्नौर, गोहाना और खरखोदा में भी पूरी तरह से ब्लैकआउट हो गया है. नाराज दुकानदारों ने चेतावनी दी है कि जब तक बिजली नहीं आएगी, वे अपनी दुकानें नहीं खोलेंगे. उधर नूंह जिले में तो बिजली गुल हुए 24 घंटे से ज्यादा का वक्त बीत चुका है. बिजली न होने के कारण मवेशियों के लिए पीने के पानी का संकट भी गहराने लगा है.
पेयजल आपूर्ति ठप और घरों में बढ़ी मुश्किलें
झज्जर छावनी की बाल्मीकि बस्ती में भी बिजली न होने से लोगों का जीना मुहाल हो गया है. पिछले दो दिनों से लाइट न आने के कारण बच्चे मोबाइल टॉर्च की रोशनी में पढ़ाई करने को मजबूर हैं. बिजली गुल होने से पानी की सप्लाई पूरी तरह से ठप हो गई है. लोग इन्वर्टर और जनरेटर के सहारे काम चला रहे थे, लेकिन अब वे भी जवाब दे चुके हैं. रोजमर्रा के घरेलू काम रुक जाने से महिलाओं और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा दिक्कत उठानी पड़ रही है.
निजीकरण के विरोध में सड़कों पर उतरे कर्मचारी
हरियाणा बिजली कर्मचारी और इंजीनियर्स संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले कर्मचारी 22 से 24 अक्टूबर तक हड़ताल पर हैं. कर्मचारियों का विरोध हरियाणा बिजली नियामक आयोग (HERC) के उस फैसले के खिलाफ है, जिसमें इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को 25 साल का लाइसेंस दिया गया है. कर्मचारियों का आरोप है कि यह पिछले दरवाजे से किया जा रहा निजीकरण है. इससे सरकारी निगमों को भारी नुकसान होगा. गुस्से में कर्मचारियों ने कई जगहों पर पुतले फूंके और आयोग के आदेश की प्रतियां जलाईं.
सरकार का आश्वासन और हड़ताल खत्म करने की अपील
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार भी एक्शन मोड में आ गई है. ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कहा है कि सरकार इस आदेश के खिलाफ अपीलीय न्यायाधिकरण (APTEL) में जाएगी और जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट भी का दरवाजा खटखटाएंगे. वहीं मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने उच्च स्तरीय बैठक बुलाकर कर्मचारियों से हड़ताल वापस लेने की अपील की है. मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया है कि त्योहारी सीजन में आम जनता को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी और सरकार कर्मचारियों के साथ खड़ी है.
