People Against SIR protest: अक्टूबर को SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ ‘पीपल अगेंस्ट SIR’ गठबंधन का देशव्यापी प्रदर्शन है। वहीं बीजेपी भी जवाब देने के लिए पदयात्राएं निकालेगी.

People Against SIR protest: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश में राजनीतिक पारा चढ़ गया है. 23 अक्टूबर 2026 को पूरे देश में एक बार फिर बड़ा संग्राम देखने को मिल सकता है. ‘पीपल अगेंस्ट SIR’ गठबंधन ने इस दिन देशव्यापी आंदोलन का आह्वान किया है. प्रदर्शनकारियों ने ‘हर हाथ में तिरंगा, हर गली में जंतर-मंतर’ का नारा दिया है. वहीं दूसरी तरफ सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) भी विपक्ष के इन सभी आरोपों का जवाब देने के लिए सड़कों पर उतरने की पूरी तैयारी कर चुकी है.
SIR प्रक्रिया रद्द करने और CEC के इस्तीफे की मांग
‘पीपल अगेंस्ट SIR’ गठबंधन की मुख्य मांग है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) की पूरी प्रक्रिया को तुरंत रद्द किया जाए. इसके साथ ही प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं. इस आंदोलन को धार देने के लिए 200 से ज्यादा सामाजिक और राजनीतिक संगठन एक साथ आ चुके हैं. इसमें छात्रों, किसानों, मजदूरों, दलितों और आदिवासियों से जुड़े समूह शामिल हैं. इनका साफ कहना है कि SIR प्रक्रिया के नाम पर कई वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं.
आंदोलन में शामिल होंगे कई बड़े और चर्चित चेहरे
इस देशव्यापी प्रदर्शन को समर्थन देने के लिए कई जाने-माने लोग सामने आए हैं. इसमें केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति और राजनीतिक अर्थशास्त्री पराकला प्रभाकर प्रमुख रूप से शामिल हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर लोगों से लोकतंत्र बचाने के लिए आगे आने की अपील की है. उनके अलावा वकील प्रशांत भूषण, किसान नेता राकेश टिकैत, सामाजिक कार्यकर्ता तुषार गांधी, अभिनेता प्रकाश राज और छात्र नेता आईशे घोष जैसी कई प्रमुख हस्तियां भी इस विरोध मार्च में हिस्सा लेंगी.
दिल्ली में सुरक्षा कड़ी और BNSS धारा 163 लागू
राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं. नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी गई है. इसके तहत बिना लिखित अनुमति के पांच या उससे ज्यादा लोगों के एक साथ इकट्ठा होने और नारेबाजी करने पर रोक है. इससे पहले भी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं को हिरासत में लिया गया था. ऐसे में प्रशासन की पाबंदियों के बीच 23 अक्टूबर को दिल्ली में चुनाव आयोग के दफ्तर तक मार्च निकालना एक बड़ी चुनौती होगा.
विपक्ष को जवाब देने के लिए BJP का ‘लोकतंत्र बचाओ’ अभियान
एक तरफ जहां गठबंधन सड़कों पर उतरने की तैयारी में है, वहीं बीजेपी भी पीछे हटने के मूड में नहीं है. बीजेपी 23 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक ‘लोकतंत्र बचाओ, भीड़तंत्र हटाओ’ नाम से बड़ा जनसंपर्क अभियान शुरू करने जा रही है. पार्टी का मकसद SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे दावों का करारा जवाब देना है. इसके तहत बीजेपी देशभर के सभी जिलों में बड़ी-बड़ी पदयात्राएं निकालेगी और उनके वरिष्ठ नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस कर जनता के सामने अपना पक्ष रखेंगे.
23 अक्टूबर को होगा सीधा राजनीतिक आमना-सामना
शुक्रवार 23 अक्टूबर को देश में एक तरफ जहां विपक्ष और किसान संगठन जिला और तहसील स्तर पर प्रदर्शन करेंगे, वहीं दूसरी ओर सत्ताधारी दल पदयात्रा निकालेगा. संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने भी इस विरोध को अपना समर्थन दिया है. दोनों ही पक्ष एक ही दिन अपने अभियानों की शुरुआत कर रहे हैं, जिससे देश की राजनीति का गरमाना तय है. अब देखना यह होगा कि दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियों के कड़े रुख के बीच यह आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है और किसे कितना जनसमर्थन मिलता है.
