ऑनलाइन पार्सल में आने वाला बबल रैप केवल बच्चों को ही नहीं बड़ों को भी काफी पसंद है. यह हर किसी को पसंद आ जाता है. लोग जैसी ही इसे देखते है, तो खुश हो जाते हैं. वह इनमें लगे बबल रैप को फोड़ते हैं. हालांकि, इस रैप को लोग काफी पंसद करते है, लेकिन आज तक किसी ने भी इसके बारे में जानने की कोशिश नहीं की है. दरअसल, जिसे हम एक इतने खुश होकर फोड़ते है. वह एक फेल्ड लैब एक्सपैरिमेंट था. अगर सही समय पर इसका काम क्या है का पता नहीं लगाया जाता. तो आज यह लोगों के बीच में होता भी नहीं.
1957 में हुआ था इन्वेंट
1957 में दो अमेरिकी इंजीनियर अल्फ्रेड फील्डिंग और मार्क चवनेस न्यू जर्सी के अपने गैरेज में एक एक्सपैरिमेंट कर रहे थे. वह प्लास्टिक वॉलपेपर तैयार कर रहे थे, जिसमें एक अलग तरीके का टेक्सचर हो. लोग उन्हें ताकि अपने घर पर एक अलग लुक के लिए दीवारों में लगा सके.
इसके बाद उन्होंने दो प्लास्टिक की चादरों को लिया और उसे एक मशीन की मदद से आपस में चिपकाने की कोशिश की. हालांकि, इसको ट्राय करते समय मशीन में अचानक ही गड़बड़ हो गई, जिसके बाद दोनों प्लास्टिक की शीट के बीच में हवा फंस गई. शीट समतल के बजाय छोटे-छोटे हवा से भरी बन गई थी.
कोई भी ऐसे वॉलपेपर को अपने घर में नहीं लगाना चाहता था, जिसके कारण वॉलपेपर के लिहाज से यह पूरी तरीके से मार्केट में पिट गई. इसके बाद दोनों वैज्ञानिकों ने इसे दूसरे कामों में लगाया.
दोनों ने इसे ग्रीनहाउस की छत और दीवारों को ढंकने के लिए मार्केट में लांच किया. उन्होंने इसे एक अच्छे इंसुलेटर के रूप में ग्रीन हॉउस में तापमान को संतुलित करने वाले प्रोडक्ट के रूप में मार्केट में लांच किया. हालांकि, उनका यह आइडिया भी बाजार में पिट गया.
IBM ने बदली तकदीर
इसके बाद बबल रैप को लांच करने वाले अविष्कारों के लिए किस्मत तब चमकी, जब 1960 में IBM ने नया और बेहद संवेदनशील 1401 कंप्यूटर मार्केट में लॉन्च किया. मंहगे और इलेक्ट्रॉनिक सामान को एक जगह से दूसरी जगह भेजना उस समय लोगों के लिए काफी मुश्किल हुआ करता था. उस समय में लोग कागज या कोई पुरानी रुई का उपयोग किया करते थे. कागज और रुई तब झटकों को सहन कर पाने में फेल थे. मार्क चवनेस ने IBM को अपना यह बबल वाला प्लास्टिक दिखाया. मार्क चवनेस ने इस हवा भरे बुलबुले को एक कुशन के रूप में प्रयोग किया. बबल रैप के प्रयोग से प्रोडक्ट आसानी से हवा में उड़ान भर पाया. उसमें किसी भी तरीके की टूटने से संबंधित दिक्कत नहीं आई.
उसके बाद सील्ड एयर कॉर्पोरेशन कंपनी ने इसे बबल रैप के नाम से ट्रेडमार्क किया. इसका प्रयोग ऑनलाइन से लेकर ऑफलाइन सभी जगहों पर नाजुक सामान की डिलीवरी के लिए किया जाने लगा.
ये भी पढ़ें: पाकिस्तान-अफगानिस्तान जंग में कूदा चीन! संभाली मध्यस्थता की कमान; शटल डिप्लोमेसी से तेज की बातचीत
