Ban on installation of smart meters in UP: लखनऊ में पुराने बिजली मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगा दी गई है. उपभोक्ताओं की शिकायतों और तकनीकी दिक्कतों को देखते हुए यह एक बड़ी खबर है. केंद्र सरकार की रिवैंप डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के तहत उपभोक्ताओं के घरों में लगे मैनुअल मीटरों को स्मार्ट मीटर में बदला जा रहा है. बीते काफी दिनों से स्मार्ट मीटरों की क्वालिटी को लेकर शिकायतें आ रही थीं. सीएम योगी ने सख्त रुख अपनाते ही इसकी जांच करवाने का दिया था. उपभोक्ताओं की बढ़ती शिकायतों और मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद गठित तकनीकी कमेटी की रिपोर्ट आने तक यह रोक प्रभावी रहेगी. हालांकि, नए बिजली कनेक्शन स्मार्ट प्रीपेड मीटर से ही दिए जाएंगे.
स्मार्ट मीटर की गुणवत्ता को लेकर सवाल
केंद्र सरकार की रिवैंप डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम के तहत उपभोक्ताओं के घरों में लगे मैन्युअल मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदला जा रहा है. बदले मीटर को बाद में बिना उपभोक्ताओं की सहमति के प्रीपेड में बदल दिया जा रहा था. बीते काफी दिनों से स्मार्ट मीटर की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो रहे थे.
स्मार्ट मीटर से बदलने की प्रक्रिया पर रोक
सीएम योगी आदित्यनाथ तक शिकायत पहुंचने के बाद उन्होंने इसकी जांच करवाने के आदेश दिए थे. पावर कारपोरेशन ने जांच के लिए चार सदस्य विशेषज्ञ समिति गठित कर दी है इसे 10 दिनों में रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है. विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट आने तक पुराने मीटरों को स्मार्ट मीटर से बदलने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई है. तकरीबन 27000 करोड़ खर्च कर पुराने मीटर को स्मार्ट मीटर से बदला जा रहा है. बदले जा रहे मीटरों का खर्च उपभोक्ताओं से नहीं लिया जा रहा.
जानिए अब तक के आंकड़े
विभागीय जानकारी के अनुसार, प्रदेश में अब तक कुल 78 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं. इनमें से 70.50 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर हैं. पावर कॉरपोरेशन का लक्ष्य पूरे प्रदेश को प्रीपेड सिस्टम पर लाने का है, लेकिन फिलहाल तकनीकी बाधाओं और जनता के विरोध ने इस रफ्तार को थाम दिया है. पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष ने साफ किया है कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा हमारी प्राथमिकता है.
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