India-China Border Dispute: अरुणाचल प्रदेश में भारत और चीन के सैनिक एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं. 21 साल में 25 दौर की बैठकों के बावजूद सीमा विवाद क्यों नहीं सुलझ रहा, जानिए पूरा गणित.

India-China Border Dispute: भारत और चीन के बीच दशकों पुराना सीमा विवाद एक बार फिर से सुर्खियों में आ गया है. आईटीबीपी के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने खुलासा किया है कि पिछले कुछ महीनों में अरुणाचल प्रदेश में दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने आ गए थे. कई जगहों पर अभी भी तनाव की स्थिति बनी हुई है. दोनों देशों के बीच सीमा विवाद सुलझाने के लिए लंबे समय से कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर बातचीत चल रही है. इसके बावजूद पूरी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर किसी अंतिम समझौते तक पहुँचना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है.
चीन के कब्जे में कितनी जमीन और कहाँ-कहाँ है दावा?
भारत और चीन के बीच सीमा विवाद बहुत फैला हुआ है. संसद में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में भारत की लगभग 38,000 वर्ग किलोमीटर जमीन पर चीन का अवैध कब्जा है. इसके अलावा साल 1963 में हुए एक समझौते के तहत पाकिस्तान ने पीओके (PoK) की करीब 5,180 वर्ग किलोमीटर भारतीय जमीन चीन को दे दी थी. दूसरी तरफ, पूर्वी क्षेत्र में चीन भारत के पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश की लगभग 90,000 वर्ग किलोमीटर जमीन पर अपना दावा ठोकता है.
2003 से शुरू हुई विशेष प्रतिनिधियों की 25 बैठकें
सीमा विवाद का राजनीतिक समाधान निकालने के लिए दोनों देशों ने साल 2003 में विशेष प्रतिनिधियों की नियुक्ति की थी. साल 2005 में दोनों पक्षों ने सीमा विवाद सुलझाने के लिए कुछ राजनीतिक मानकों और सिद्धांतों पर दस्तखत किए थे. अगस्त 2026 तक बीजिंग में एनएसए अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच 25वें दौर की बातचीत संपन्न हो चुकी है. हालांकि इतने सालों में 25 अहम बैठकें होने के बावजूद कोई ऐसा स्थाई और अंतिम फ्रेमवर्क तैयार नहीं हो पाया है, जो दोनों देशों को पूरी तरह मंजूर हो.
25वीं बैठक में बने आठ बड़े समझौतों के बिंदु
अगस्त 2026 में हुई 25वीं बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच आठ प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनी है. इसके तहत सीमा पर शांति बनाए रखने और 2005 के सिद्धांतों के आधार पर बातचीत आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है. इसके अलावा, पूर्वी और मध्य क्षेत्रों में दो नई सैन्य हॉटलाइन शुरू करने और वरिष्ठ सैन्य कमांडरों के लिए दो नए बैठक स्थल बनाने का फैसला हुआ है. कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए तीर्थयात्रियों की संख्या बढ़ाने, नदियों का जलस्तर साझा करने और तीन तय सीमा व्यापार केंद्रों को दोबारा खोलने पर भी सहमति बनी है.
गलवान हिंसा के बाद से कैसे रहे हैं दोनों देशों के संबंध?
जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद से दोनों देशों के बीच भरोसा काफी कम हो गया था. भारत ने सुरक्षा कारणों से टिकटॉक समेत कई चीनी ऐप्स पर बैन लगा दिया था और उड़ानों पर रोक लगा दी थी. हालांकि, अक्टूबर 2024 में लद्दाख में सैनिकों की वापसी पर सहमति बनने के बाद हालात कुछ सुधरे हैं. साल 2025 में सीधी उड़ानें दोबारा शुरू हुईं और व्यापार भी तेजी से बढ़ा. 2025 में भारत-चीन द्विपक्षीय व्यापार 12 प्रतिशत बढ़कर 155.6 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया.
सबसे बड़ी अड़चन क्या है और आगे का रास्ता क्या होगा?
सीमा पर शांति बनाए रखना और विवादित जमीन का अंतिम फैसला करना दो बिल्कुल अलग बातें हैं. 25वीं बैठक में हॉटलाइन और नए बैठक स्थलों के जरिए तनाव तुरंत घटाने का इंतजाम तो किया गया है, लेकिन सीमा निर्धारण का दायरा अभी तय होना बाकी है. दोनों देशों ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि जमीन पर अंतिम रेखा कहाँ खींची जाएगी और सीमांकन का स्वरूप क्या होगा. अब सभी की निगाहें 2027 में भारत में होने वाली विशेष प्रतिनिधियों की 26वीं बैठक पर टिकी हैं.
