अभी के समय में सेशेल्स देश और भारत के संबंधों की काफी चर्चा हो रही है. दरअसल, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सेशेल्स देश के आजाद होने के 50 साल पूरे होने पर समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे. इस समारोह से दोनों देशों के बीच के संबंध काफी अच्छे हो गए है. इस मुलाकात में समुद्री सुरक्षा से संबंधित कई अहम चीजों पर चर्चा हुई है. हालांकि, कई लोगों को नहीं पता कि यह देश भारत की समुद्री सुरक्षा को लेकर काफी अहम रोल निभाता है. कई बार चीन ने इस देश को भारत के खिलाफ करने की कोशिश की है. हालांकि, हर बार यहां के राष्ट्रपति ने चीन के इस प्लान को फेल कर दिया है. समारोह के दौरान भी ऐसा ही कुछ देखने को मिला था. चीन भी दोस्ती को मजबूत करने के लिए आयोजन में सम्मिलित होते दिखाई दिया था.
क्यों चाहता है चीन सेशेल्स से दोस्ती बढ़ाना?
हालांकि, इन बातों को समझने से पहले हमें हमारे अन्य पड़ोसी देशों के हाल पर नजरें डालनी चाहिए. दरअसल, चीन ‘कर्ज के जाल’ वाली नीति अपनाता है. पड़ोसी देश श्रीलंका और पाकिस्तान दोनों चीन के कर्जे में डूबे है और दोनों ही देशों का हाल सभी लोग जानते हैं. अब वैश्विक भू-राजनीतिक अटलांटिक से हटकर हिंद महासागर की ओर खिसक चुकी है. इस महासागर में जो अपनी कमान संभाल लेगा. वहीं, आने वाले समय में वैश्विक व्यापार का राजा बनेगा. साथ ही सुरक्षा की कमान भी संभालेगा.
इसी कारण से चीन ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ नीति का प्रयोग करके चारों तरफ से भारत को घेरने की कोशिश कर रहा है. कई देशों को अपने कर्ज में डुबाकर चीन ने श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह और पाकिस्तान के ग्वादर पर अपने नौसेनिक ठिकाने बनाने शुरू कर दिए है. हालांकि, इस नीति को पूरा करने के लिए जो देश सबसे जरूरी है वह सेशेल्स है.
दरअसल, सेशेल्स भले ही छोटा देश है, लेकिन उसकी भौगोलिक स्थिति हिंद महासागर में काफी महत्व रखती है. इन्हीं कारणों की वजह से बार-बार चीन सेशेल्स से बातचीत और संबंध बनाने में लगा हुआ है. चीन बाकी देशों को फंसाकर भारत को चारों तरफ से घेरने में लगा है. उसने पाकिस्तान और श्रीलंका पर अपने नौसैनिक ठिकाने बनाने शुरू कर दिए है. हालांकि, इस पूरे जाल का मेन मोहरा सेशेल्स है. अगर चीन सेशेल्स द्वीप पर अपनी पकड़ बना लेता है. तो भारत के लिए यह काफी दिक्कत वाली बात होगी. दरअसल, सेशेल्स से दोस्ती करके चीन भारतीय नौसेना की गतिविधि पर नजर, उसे ठप करना और व्यापारिक जहाजों के आने-जाने को रोक सकता है.
हालांकि, भारत और चीन के संबंध बनाने का तरीका बिल्कुल अलग है. चीन कर्ज के जाल में डुबाता है. तो वहीं, भारत सम्मान और दोस्ती पर वाली नीति अपनाता है. इसी कारण से सेशेल्स ने भारत को अपने भरोसेमंद सुरक्षा भागीदार के रूप में चुना है. सेशेल्स जानता है कि चीन का निवेश उनके लिए खतरा बनेगा. भारत ने सेशेल्स को इसी कारण से वित्तीय पैकेज और सैन्य उपकरण दिए है. साथ ही संकट के समय में एक सच्चे पड़ोसी की भूमिका निभाई है.
भारत को सेशेल्स की दोस्ती से मिला फायदा
दरअसल, सेशेल्स के कई द्वीपों पर भारत ने तटीय रडार लगाए है. इनकी निगरानी सेशेल्स के कोस्ट गार्ड और भारतीय नौसेना करती है. इन तटीय रडारों से चीन की पनडुब्बियों पर 24 घंटे नजर रखी जाती है.
भविष्य में एयरस्ट्रिप से जुड़ी सुविधाएं होगी विकसित
दरअसल, सेशेल्स का अजम्पशन आइलैंड काफी महत्व रखता है. इसी कारण से भारत यहां पर नौसेना और एयरस्ट्रिप से संबंधित सुविधा विकसित करने वाला है. हालांकि, चीन ने बार-बार इसे रोकने का प्रयास किया, लेकिन भारत फिर भी आगे बढ़ता रहा. इस योजना से समुद्र की गहराई, उसकी नीचे की स्थिति और रास्ते की पूरी जानकारी मिलेगी. दुश्मनी पनडुब्बियों का पता लगाने में काफी आसानी होगी.
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