India us trade deal: भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर पाकिस्तान के विश्लेषक नजम सेठी ने कहा कि भारत किसी के दबाव में नहीं बल्कि अपनी शर्तों पर बातचीत कर समझौता करता है. उन्होंने माना कि टैरिफ घटने से भारत को बड़ा फायदा हुआ है और पाकिस्तान की तुलना में भारत की रणनीति ज्यादा मजबूत रही है.

India us trade deal: भारत-अमेरिका के बीच हुई नई ट्रेड डील की चर्चा अब पाकिस्तान में भी तेज हो गई है. पाकिस्तान के जाने-माने राजनीतिक विश्लेषक और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के करीबी माने जाने वाले नजम सेठी ने इस समझौते की खुलकर तारीफ की है. उन्होंने कहा कि भारत किसी के इशारों पर नहीं चलता. भारत अपनी शर्तों पर बात करता है. और बातचीत के जरिए अपने फायदे का सौदा तय करता है. व्हाइट हाउस ने भी साफ किया है कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में बड़ा कदम बढ़ चुका है. दोनों देशों के बीच अंतरिम सहमति बन गई है. इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर लगाया गया 50 प्रतिशत टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है.
इस समझौते से भारत के किसानों. छोटे कारोबारियों. एमएसएमई. स्टार्टअप्स और मछुआरों को नए बाजार मिलने की उम्मीद है. नजम सेठी ने एक पाकिस्तानी टीवी शो में कहा कि भारत किसी दबाव में समझौता नहीं करता. भारत शांत तरीके से बातचीत करता है. और वही रियायतें देता है जो उसके हित में होती हैं. उन्होंने कहा कि भारत किसी देश को खुश करने के लिए सौदे नहीं करता. बल्कि अपने आर्थिक और राष्ट्रीय हित देखकर फैसले करता है. उन्होंने यह भी माना कि भारत ने कुछ व्यापारिक रियायतें जरूर दी हैं. लेकिन ये रियायतें भारतीय किसानों के खिलाफ नहीं हैं. बल्कि किसानों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दी गई हैं.
नजम सेठी ने इस दौरान पाकिस्तान की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अक्सर भावनाओं में आकर फैसले लेता है. जबकि भारत बातचीत और रणनीति के आधार पर आगे बढ़ता है. उन्होंने साफ कहा कि पाकिस्तान में राजनीति सम्मान और रिश्तों पर आधारित होती है. जबकि भारत व्यावहारिक सोच के साथ समझौते करता है. सेठी के मुताबिक भारत ने अमेरिका को कुछ व्यापारिक सुविधाएं दी हैं. लेकिन यह कहना गलत है कि भारत ने अपने किसानों से समझौता कर लिया है. उनके अनुसार भारत ने अपने कृषि और डेयरी सेक्टर के हित सुरक्षित रखे हैं.
सेठी ने ट्रंप को लेकर पाकिस्तान सरकार की सोच पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि शहबाज शरीफ सरकार ने ट्रंप की काफी तारीफ की. लेकिन इसका कोई खास फायदा पाकिस्तान को नहीं मिला. उन्होंने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता. भविष्य में अमेरिका ऐसी शर्तें रख सकता है जिन्हें पूरा करना पाकिस्तान के लिए मुश्किल होगा. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर मध्य-पूर्व की स्थिति बदली और भारत-अमेरिका रिश्ते फिर मजबूत हुए. तो पाकिस्तान और अमेरिका के संबंधों में दबाव आ सकता है.
अमेरिका ने पहले भारतीय सामानों पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया था. इसमें 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क रूस से तेल खरीदने को लेकर लगाया गया था. लेकिन 2 फरवरी को ट्रंप ने घोषणा की कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर सहमति बन गई है. इसके बाद कुल टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया. ट्रंप ने यह भी दावा किया कि भारत रूसी तेल को लेकर अपने रुख में बदलाव के लिए तैयार हुआ है. हालांकि भारत लंबे समय से अपने कृषि और डेयरी सेक्टर को लेकर अमेरिका से सख्त बातचीत कर रहा था. आखिरकार भारतीय किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए समझौता हुआ. इस खबर में किसी डॉक्टर का बयान शामिल नहीं है. क्योंकि यह विषय पूरी तरह व्यापार और विदेश नीति से जुड़ा हुआ है.
