iran us talks conditions: ईरान ने अमेरिका के साथ जंग खत्म करने के लिए तीन शर्तें रखी हैं, जिनमें फ्रीज फंड रिलीज करना शामिल है. कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता के बीच ईरान ने चेतावनी दी है कि हमला होने पर वह अमेरिकी सैन्य ठिकानों को तबाह कर देगा.

iran us talks conditions: अमेरिका और ईरान के बीच जारी भारी तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. ईरान ने अमेरिका के साथ जारी जंग को खत्म करने और मेज पर बैठकर बातचीत करने के लिए अपनी कुछ शर्तें रखी हैं. तेहरान ने मध्यस्थता करा रहे देशों को उन शर्तों की जानकारी दे दी है. ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई ने शनिवार को दिए एक इंटरव्यू में यह खुलासा किया है. हालांकि, इसके साथ ही ईरान ने अमेरिका को सख्त चेतावनी भी दी है कि अगर उस पर हमला हुआ तो वह चुप नहीं बैठेगा.
जंग रोकने के लिए ईरान ने रखीं ये तीन बड़ी शर्तें
मोहसिन रेजाई के मुताबिक ईरान बातचीत के लिए पूरी तरह से तैयार है. लेकिन इसके लिए उसने अमेरिका के सामने तीन मुख्य शर्तें रखी हैं. पहली शर्त यह है कि सभी मोर्चों पर जारी जंग को तुरंत रोका जाए. दूसरी शर्त है कि विदेशों में फ्रीज किए गए ईरान के पैसों को रिलीज किया जाए. तीसरी और आखिरी शर्त यह है कि ईरान पर लगाई गई नौसैनिक नाकाबंदी को पूरी तरह से खत्म किया जाए. कतर और पाकिस्तान इस बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं. अब तेहरान को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जवाब का इंतजार है.
अमेरिका को सीधी चेतावनी, हमले का देंगे करारा जवाब
एक तरफ जहां बातचीत का रास्ता खोला गया है, वहीं दूसरी तरफ ईरान ने कड़ा रुख भी अपनाया है. रविवार को ईरान की सरकारी मीडिया और केंद्रीय सैन्य कमान ने कहा कि उन्हें खुफिया जानकारी मिली है. अमेरिका कुछ पड़ोसी देशों की मदद से ईरान पर फिर से सैन्य हमला करने की फिराक में है. ईरानी सेना ने साफ लहजे में कहा है कि अगर अमेरिका ने कोई दुस्साहस किया, तो मिडल ईस्ट में मौजूद तमाम अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए जाएंगे.
सहयोगी देशों को भी भुगतना पड़ेगा अंजाम
ईरानी सेना ने सिर्फ अमेरिका ही नहीं, बल्कि उसके मददगार देशों को भी आड़े हाथों लिया है. ईरान ने चेतावनी दी है कि जो भी क्षेत्रीय देश अमेरिका के इस हमले में उसका साथ देंगे, उन्हें भी इस युद्ध का हिस्सा माना जाएगा. फिर ईरान उन देशों पर भी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा. इस कड़े बयान से साफ है कि तेहरान अपनी सुरक्षा को लेकर कोई ढील नहीं देना चाहता. वह कूटनीति के साथ-साथ सैन्य मोर्चे पर भी पूरी तरह से मुस्तैद दिख रहा है.
क्षेत्रीय शांति के लिए भी आगे आया ईरान
इंटरव्यू में मोहसिन रेजाई ने सिर्फ अमेरिका-ईरान तनाव की ही बात नहीं की, बल्कि मध्य पूर्व के अन्य विवादों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि ईरान क्षेत्र में स्थायी शांति चाहता है. तेहरान सऊदी अरब और यमन के बीच लंबे समय से चल रहे युद्ध को खत्म कराने में मदद करने के लिए तैयार है. इसके अलावा ईरान अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी सीमा विवाद और तनाव को भी सुलझाने में अपनी भूमिका निभाना चाहता है.
कूटनीति और जंग के मुहाने पर खड़ा मिडल ईस्ट
ईरान के इस कदम से पूरा क्षेत्र अब एक नाजुक मोड़ पर आ खड़ा हुआ है. एक तरफ जहां कतर और पाकिस्तान के जरिए कूटनीतिक रास्ते तलाशने की कोशिश हो रही है, वहीं दूसरी तरफ सैन्य टकराव का खतरा भी मंडरा रहा है. अब देखना यह होगा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान की इन शर्तों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं. दुनिया भर की नजरें अब वॉशिंगटन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं.
