pakistan defense minister khawaja asif: इस खबर में जानिए हूती विद्रोहियों के हमलों के बाद मक्का की सुरक्षा पर पाकिस्तान के बदले रुख का सच. समझिए कैसे रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने रक्षा समझौते से इतर बयान दिया और ईरान तक सऊदी का क्या संदेश पहुंचाया.

pakistan defense minister khawaja asif: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने मक्का की सुरक्षा को लेकर अपना रुख बदल लिया है. हाल ही में सऊदी अरब ने मक्का शहर के पास हूती विद्रोहियों के ड्रोन हमले को नाकाम करने का दावा किया था. इस घटना के बाद पूरी दुनिया में सऊदी अरब के प्रति सहानुभूति देखी जा रही है. इसी अंतरराष्ट्रीय माहौल को देखते हुए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि मक्का की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान को किसी रक्षा समझौते की जरूरत नहीं है. हर मुसलमान का यह फर्ज है कि वह पवित्र स्थलों की रक्षा करे.
सऊदी-हूती विवाद और मक्का रक्षा समझौता: आखिर क्यों बैकफुट पर दिखा पाकिस्तान?
दरअसल पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच पिछले महीने एक त्रिपक्षीय रक्षा समझौता हुआ था. इस समझौते के तहत किसी भी एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा. लेकिन जब हूती विद्रोहियों के हमले बढ़े, तो शुरुआत में पाकिस्तान इस समझौते को लागू करने से बचता नजर आया. पाकिस्तान का कहना था कि पुराना विवाद इस रक्षा संधि के दायरे में नहीं आता है. हालांकि, जब मक्का पर हमले की कोशिश की वैश्विक निंदा हुई, तो पाकिस्तान ने तुरंत अपना पैंतरा बदल लिया.
विदेश कार्यालय का बड़ा बयान: रक्षा समझौते को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है पाकिस्तान
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने भी इस मुद्दे पर मीडिया को संबोधित किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ हुए रक्षा समझौते को बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. जब उनसे पूछा गया कि क्या पाकिस्तान हूती हमलों को रोकने के लिए अपनी सेना भेजेगा, तो उन्होंने सैन्य रणनीति की गोपनीयता का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि कब, कहाँ और किस तरह बल प्रयोग होगा, इसका खुलासा सुरक्षा कारणों से नहीं किया जा सकता.
ईरान तक पहुंचाया सऊदी का संदेश: क्षेत्रीय तनाव कम करने की कोशिश
पाकिस्तान ने इस मामले में कूटनीतिक मध्यस्थ की भूमिका निभाने का भी दावा किया है. रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बताया कि उन्होंने सऊदी अरब की चिंताओं को ईरान सरकार तक पहुँचा दिया है. उन्होंने कहा कि ईरान पहले से ही कई मोर्चों पर उलझा हुआ है. ऐसे में तेहरान का हूती विद्रोहियों का खुलकर समर्थन करना समझदारी भरा कदम नहीं होगा. पाकिस्तान की कोशिश है कि यह युद्ध क्षेत्र के अन्य हिस्सों में न फैले.
समुद्री व्यापार पर संकट: लाल सागर और बाब अल-मंदेब की स्थिति गंभीर
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने बाब अल-मंदेब और लाल सागर के हालात को बेहद गंभीर बताया है. हूती विद्रोहियों द्वारा समुद्री रास्तों में डाली जा रही रुकावटों से ग्लोबल ट्रेड प्रभावित हो रहा है. इसका सीधा असर पाकिस्तान की अपनी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है. इसलिए पाकिस्तान ने हूतियों से अपने हमले रोकने की अपील की है. पाक सरकार का मानना है कि जबरदस्ती के बजाय बातचीत और कूटनीति के जरिए ही इस संकट का हल निकाला जा सकता है.
सैन्य सहयोग बढ़ाने का संकेत: गैर-सरकारी समूहों के खिलाफ एकजुटता
ख्वाजा आसिफ ने संकेत दिया कि अगर खाड़ी देशों को अपनी सुरक्षा खुद करनी पड़ी, तो वे गैर-सरकारी सशस्त्र समूहों के खिलाफ एकजुट होंगे. पाकिस्तान चाहता है कि क्षेत्रीय देश मिलकर इन विद्रोहियों का मुकाबला करें. मक्का की सुरक्षा का मुद्दा उठाकर पाकिस्तान मुस्लिम देशों में अपनी छवि बेहतर बनाना चाहता है. अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान अपनी इस प्रतिबद्धता को जमीन पर किस तरह से लागू करता है.
