kanpur kidney racket busted: कानपुर पुलिस ने एक बड़े किडनी रैकेट का भंडाफोड़ किया है जिसने अब तक 60 से अधिक अवैध ट्रांसप्लांट किए हैं. इस मामले में आहुजा अस्पताल के मालिक डॉक्टर दंपत्ति सहित 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जो गरीब लोगों को पैसे का लालच देकर उनके अंग निकालते थे और मरीजों से लाखों रुपये वसूलते थे.

kanpur kidney racket busted: कानपुर में सामने आया किडनी रैकेट सिर्फ अपराध का मामला नहीं है. यह इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना है. जांच में पता चला कि इस गिरोह ने अब तक 60 से ज्यादा लोगों का गैरकानूनी किडनी ट्रांसप्लांट कराया. इस धंधे से करोड़ों रुपये कमाए गए. कई लोगों की जिंदगी बर्बाद हो गई. कुछ लोगों की मौत भी हो गई. कई पीड़ित आज भी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं. इस खुलासे ने प्रशासन और पूरे देश को हैरान कर दिया है.
इस मामले का खुलासा एक फोन कॉल से हुआ. 30 मार्च को कानपुर पुलिस को एक युवक ने कॉल किया. उसने बताया कि उसकी किडनी धोखे से निकाल ली गई है. उससे 6 लाख रुपये देने का वादा किया गया था. लेकिन उसे सिर्फ 3 लाख रुपये ही मिले. पुलिस तुरंत हरकत में आई. कॉल करने वाला युवक आयुष था. वह बिहार का रहने वाला है. आयुष मेरठ की एक महिला को किडनी देने के लिए कानपुर आया था. ऑपरेशन के बाद उसे धोखे का पता चला. तब उसने पुलिस को पूरी बात बताई.
जांच में सामने आया कि आयुष और महिला पारुल के बीच कोई रिश्तेदारी नहीं थी. कानून के अनुसार अंगदान सिर्फ परिवार के बीच या विशेष अनुमति के बाद ही हो सकता है. लेकिन इस मामले में नियमों की अनदेखी की गई. दलाल गरीब और जरूरतमंद लोगों को पैसे का लालच देकर फंसाते थे. आयुष भी पढ़ाई कर रहा था और परिवार की जिम्मेदारी उसके ऊपर थी. इसी मजबूरी का फायदा उठाकर उसे इस रैकेट में शामिल कर लिया गया.
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि आयुष की किडनी का सौदा 9 लाख रुपये में हुआ था. लेकिन उसे केवल साढ़े 6 लाख रुपये मिले. वहीं जिस महिला को किडनी दी गई, उससे करीब 90 लाख रुपये वसूले गए. यानी दलालों ने दोनों पक्षों को ठगकर भारी कमाई की. जांच में यह भी सामने आया कि ऑपरेशन किसी बड़े डॉक्टर ने नहीं किया था. बल्कि एक ओटी टेक्निशियन मुदस्सर अली ने किया. उसके पास मेडिकल डिग्री भी नहीं थी. फिलहाल वह फरार है.
पुलिस ने इस मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार किया है. इनमें कई डॉक्टर भी शामिल हैं. गिरफ्तार लोगों में आहुजा अस्पताल के मालिक डॉ. सुरजीत आहूजा और उनकी पत्नी डॉ. प्रीति आहूजा भी हैं. जांच में पता चला कि इस रैकेट का नेटवर्क काफी बड़ा था. दिल्ली, मेरठ और कानपुर के कई अस्पतालों के कर्मचारी इसमें शामिल थे. मरीजों और गरीब डोनर्स को अलग-अलग तरीके से फंसाया जाता था. पुलिस को शक है कि इस रैकेट का नेटवर्क विदेशों तक फैला हुआ है. अब मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है.
