kerala assembly election results 2026: केरल विधानसभा चुनाव 2026 में यूडीएफ ने 99 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत हासिल किया है, जबकि एलडीएफ मात्र 35 सीटों पर सिमट गई है. इस ऐतिहासिक परिणाम के साथ ही केरल से वामपंथ का शासन समाप्त हो गया है और अब भारत के किसी भी राज्य में लेफ्ट की सरकार नहीं बची है.

kerala assembly election results 2026: केरल विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव दिखाया है. इस बार कांग्रेस के नेतृत्व वाले United Democratic Front ने जोरदार जीत दर्ज की है. मतगणना में UDF को कुल 99 सीटें मिलीं. वहीं वामपंथी दलों के गठबंधन Left Democratic Front को सिर्फ 35 सीटों पर संतोष करना पड़ा. National Democratic Alliance को केवल तीन सीटें मिलीं. इन परिणामों के बाद एक बड़ा राजनीतिक बदलाव सामने आया. अब देश में किसी भी राज्य में वामपंथी दलों की सरकार नहीं बची है. लंबे समय से केरल को लेफ्ट पार्टियों का मजबूत गढ़ माना जाता था. लेकिन इस चुनाव ने उस किले को भी ढहा दिया.
चुनाव के दौरान कई सीटों पर दिलचस्प मुकाबले देखने को मिले. मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan कन्नूर जिले की धर्मदम सीट से चुनाव लड़ रहे थे. शुरुआत में वे पीछे चल रहे थे. लेकिन बाद में उन्होंने जोरदार वापसी की. करीब 15 राउंड की गिनती के बाद उन्होंने आठ हजार से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की. दूसरी तरफ LDF के संयोजक T. P. Ramakrishnan को हार का सामना करना पड़ा. कोझिकोड की पेरम्ब्रा सीट से उन्हें Fathima Tehlia ने हरा दिया. यह परिणाम भी काफी चर्चा में रहा.
कांग्रेस के कई नेताओं ने भी शानदार प्रदर्शन किया. वरिष्ठ नेता Ramesh Chennithala ने हरिपाद सीट से बड़ी जीत दर्ज की. उन्होंने CPI उम्मीदवार को 23 हजार से ज्यादा वोटों से हराया. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री K. Karunakaran की बेटी Padmaja Venugopal को त्रिशूर सीट से एक बार फिर हार का सामना करना पड़ा. पय्यानूर सीट का नतीजा भी काफी चौंकाने वाला रहा. यहां CPI(M) के मजबूत गढ़ में UDF समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार वी कुन्हीकृष्णन ने जीत दर्ज की. इसके अलावा कई जगहों पर CPI(M) के बागी नेताओं ने भी अच्छा प्रदर्शन किया.
नतीजे आते ही तिरुवनंतपुरम में कांग्रेस के मुख्यालय इंदिरा भवन में जश्न शुरू हो गया. बड़ी संख्या में कार्यकर्ता वहां इकट्ठा हुए. ढोल-नगाड़े बजाए गए और मिठाइयां बांटी गईं. टीवी स्क्रीन पर बढ़त के आंकड़े देखकर कार्यकर्ताओं का उत्साह और बढ़ गया. केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष Sunny Joseph ने कहा कि यह नतीजा जनता के गुस्से को दिखाता है. उनका कहना था कि LDF सरकार की नीतियों से लोग नाराज थे. वहीं इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने भी इस जीत का श्रेय पूरे UDF गठबंधन को दिया.
विश्लेषकों के अनुसार LDF की हार के पीछे कई वजहें रहीं. सबसे बड़ा कारण सत्ता विरोधी लहर थी. सरकार लगातार दो कार्यकाल से सत्ता में थी और लोगों में बदलाव की मांग बढ़ रही थी. चुनाव के दौरान विपक्ष ने भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के आरोप भी लगाए. कई मंत्रियों की हार ने यह भी दिखाया कि स्थानीय स्तर पर सरकार के खिलाफ नाराजगी थी. कुछ जगहों पर पार्टी के बागी नेताओं ने भी चुनाव लड़कर नुकसान पहुंचाया. अल्पसंख्यक वोटों का बड़ा हिस्सा UDF के पक्ष में गया. साथ ही कांग्रेस के प्रचार में Rahul Gandhi की सक्रियता और महिलाओं व सामाजिक योजनाओं से जुड़े वादों ने भी चुनावी माहौल को प्रभावित किया. केरल में अक्सर सत्ता बदलने की परंपरा भी रही है. इस बार भी वही ट्रेंड देखने को मिला.
