Lucknow aliganj purania fire: यह खबर ‘उत्तर प्रदेश अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा अधिनियम’ के संदर्भ में लखनऊ के अलीगंज (पुरनिया) में एक बहुमंजिला इमारत में लगी भीषण आग, 15 युवाओं की मौत और मुख्यमंत्री द्वारा की गई सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की पूरी जानकारी देता है.

Lucknow aliganj purania fire: राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में आने वाले पुरनिया में सोमवार को एक बेहद दर्दनाक हादसा हो गया. यहाँ एक बहुमंजिला इमारत में अचानक भीषण आग लग गई, जिसने देखते ही देखते पूरी बिल्डिंग को अपनी चपेट में ले लिया. इस भयानक अग्निकांड में अब तक 15 मासूम लोगों की मौत होने की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें 3 महिलाएं भी शामिल हैं. जान गंवाने वाले सभी युवाओं की उम्र महज 20 से 24 साल के बीच थी. इस खबर के फैलते ही पूरे इलाके में मातम पसर गया है. आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला. चारों तरफ चीख पुकार मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए बदहवास होकर इधर उधर भागने लगे. इस दुखद घटना के प्रशासनिक और कानूनी पहलुओं को समझने के लिए हम ‘उत्तर प्रदेश अग्नि निवारण और अग्नि सुरक्षा अधिनियम’ (UP Fire Prevention and Fire Safety Act) की किताबों और नियमों का संदर्भ ले सकते हैं, जो ऐसी इमारतों में सुरक्षा मानकों की कड़ाई से जांच करने की बात करती हैं.
शुरुआत में सोशल मीडिया और आस पास के लोगों के बीच यह अफवाह उड़ गई थी कि इस बिल्डिंग में कोई कोचिंग सेंटर या लाइब्रेरी चल रही थी. लेकिन बाद में मौके पर पहुंचे पुलिस के बड़े अधिकारियों ने इस बात को पूरी तरह साफ कर दिया. उन्होंने बताया कि इस इमारत में न तो कोई कोचिंग संस्थान था और न ही कोई लाइब्रेरी थी. दरअसल, इस बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर पालतू जानवरों की एक दुकान यानी पेट शॉप थी. वहीं, इसकी ऊपरी मंजिल पर एक एनीमेशन सेंटर चलाया जा रहा था, जहां बहुत से युवा कर्मचारी अपना काम कर रहे थे. जैसे ही आग लगी, ऊपरी मंजिल पर मौजूद लोगों के बीच भगदड़ मच गई. कुछ लोग जान बचाने के लिए छज्जों पर लटक गए, तो एक शख्स ने घबराहट में ऊपर से ही नीचे छलांग लगा दी, जिसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है. चश्मदीदों का कहना है कि दमकल की गाड़ियां करीब आधे घंटे की देरी से पहुंचीं, जिससे लोगों का गुस्सा भड़क गया और उन्होंने पत्थर मारकर बिल्डिंग के शीशे तोड़े ताकि अंदर फंसे लोग बाहर निकल सकें.
इस दर्दनाक हादसे की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत कड़ा रुख अपना लिया है. उन्होंने राहत और बचाव कार्य में हुई देरी को लेकर फायर विभाग के बड़े अफसरों को जमकर फटकार लगाई है. सीएम योगी ने पुलिस महानिदेशक (DGP) और अपर मुख्य सचिव गृह (ACS Home) को खुद मौके पर जाकर पूरी रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि इस पूरी लापरवाही की तह तक जांच की जाएगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे सख्त से सख्त सजा दी जाएगी. वहीं, देश के प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने भी इस घटना पर गहरा दुख जताया है. केंद्र सरकार की तरफ से मृतकों के परिवारों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 2 2 लाख रुपये और सभी घायलों को 50 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया गया है. इसके अलावा कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करके पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की है.
अब बात करते हैं उस सबसे जरूरी सवाल की, जो हर किसी के जेहन में घूम रहा है कि आखिर इस खतरनाक बिल्डिंग को किसने और कब बनवाया था. स्थानीय प्रशासन और सरकारी रिकॉर्ड्स से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस व्यावसायिक इमारत का निर्माण साल 2012 13 के दौरान अलीगंज के ही एक स्थानीय प्रॉपर्टी डेवलपर और कारोबारी ने करवाया था. उस समय इस बिल्डिंग को व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए पास कराया गया था. लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस बिल्डिंग को बनाते समय और इसमें एनीमेशन सेंटर शुरू करते समय फायर ब्रिगेड से जरूरी एनओसी (NOC) ली गई थी या नहीं. क्या बिल्डिंग के अंदर आग बुझाने वाले आधुनिक उपकरण मौजूद थे? इन्हीं सब गंभीर कमियों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए हैं ताकि बिल्डिंग के मालिक और इसे पास करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सके.
फिलहाल, दमकल विभाग की कई गाड़ियों ने घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया है. मौके पर अब भी कूलिंग ऑपरेशन चलाया जा रहा है ताकि मलबे के अंदर दोबारा आग धधकने का कोई खतरा न रहे. पुलिस और जिला प्रशासन की टीमों ने साफ किया है कि बिल्डिंग के अंदर से सभी फंसे हुए लोगों को बाहर निकाल लिया गया है और अब रेस्क्यू का काम पूरा हो चुका है. अस्पताल में भर्ती घायलों के इलाज के लिए डॉक्टरों की स्पेशल टीम लगा दी गई है. लखनऊ का पूरा प्रशासन अब इस अवैध निर्माण और सुरक्षा में हुई चूकों की कड़ियों को जोड़ने में जुटा है. आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही साफ हो पाएगा कि इस बड़ी लापरवाही के पीछे असली गुनहगार कौन है, जिसने 15 हंसते खेलते युवाओं की जिंदगी को हमेशा के लिए खत्म कर दिया.
