Parliament monsoon session last week: संसद के मानसून सत्र के अंतिम हफ्ते में परिसीमन, महिला आरक्षण और एफसीआरए जैसे अहम विधेयकों को लेकर सरकार और कांग्रेस के बीच गतिरोध जारी है.

Parliament monsoon session last week: संसद के मानसून सत्र का आखिरी हफ्ता काफी गहमागहमी भरा रहने वाला है. नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू के बीच दो दिनों तक बातचीत हुई. इसके बाद भी सरकार और कांग्रेस के बीच सहमति नहीं बन सकी है. राहुल गांधी चाहते हैं कि एफसीआरए, महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयकों पर पहले सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए. वहीं सरकार का कहना है कि वह बाकी सभी राजनीतिक दलों से बातचीत कर चुकी है. अब इन अहम बिलों को पास कराने के लिए अगले दो दिनों में कोई बड़ा फैसला लिया जा सकता है.
राहुल गांधी और किरेन रिजीजू की मुलाकात
सरकार ने विपक्ष से जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए खुद पहल की थी. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने राहुल गांधी से करीब 50 मिनट तक मुलाकात की. इस दौरान राहुल गांधी ने अपने सहयोगी दलों से राय-मशविरा करने के लिए थोड़ा समय मांगा. इसके बाद विपक्षी गठबंधन की बैठक हुई, जिसमें सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग रखने का फैसला लिया गया. जब रिजीजू ने राहुल गांधी से फोन पर दोबारा बात की, तो नेता प्रतिपक्ष ने अपनी यह मांग दोहरा दी.
सर्वदलीय बैठक को लेकर सरकार का रुख
सरकार का मानना है कि सर्वदलीय बैठक बुलाने की अब कोई खास जरूरत नहीं है. सरकार के मुताबिक वह केवल कांग्रेस के साथ अलग से चर्चा करने को तैयार है. वरिष्ठ मंत्रियों का कहना है कि ये तीनों विधेयक देश के लिए बहुत संवेदनशील हैं. इसलिए सरकार इन्हें हंगामे के बीच बिना किसी बहस के पास नहीं कराना चाहती. लेकिन कांग्रेस के रुख की वजह से सदन में सहमति नहीं बन पा रही है. सरकार का साफ कहना है कि किसी एक पार्टी के विरोध के कारण इतने जरूरी बिलों को रोका नहीं जाएगा.
ईसाई समुदाय के प्रतिनिधियों से बात
एफसीआरए कानून को लेकर बनी आशंकाओं को दूर करने के लिए गृह मंत्री अमित शाह ने भी पहल की है. उन्होंने इस सिलसिले में ईसाई समुदाय के प्रमुख प्रतिनिधियों से काफी देर तक चर्चा की. सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वह सभी पक्षों से बात करके उनके मन का डर दूर कर रही है. संसद के मौजूदा सत्र में पहले भी कई विधेयक हंगामे के बीच दोनों सदनों से पास कराए जा चुके हैं. इसलिए सरकार जरूरत पड़ने पर आगे का रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेगी.
संसद का कार्यकाल बढ़ाने पर असमंजस
मानसून सत्र में अब काम-काज के केवल पांच दिन ही बाकी रह गए हैं. सत्र की समयसीमा आगे बढ़ाई जाएगी या नहीं, इसे लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है. सूत्रों का कहना है कि विधेयकों को पास कराने के लिए सरकार के पास जरूरी दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा मौजूद है. लेकिन वोटिंग की प्रक्रिया को सही तरीके से पूरा करने के लिए सदन में शांति और विपक्ष के सहयोग की जरूरत पड़ेगी. बिना इसके वोटिंग का सही माहौल बनाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है.
क्या राज्यसभा से होगी परिसीमन बिल की शुरुआत
चर्चा यह भी है कि परिसीमन बिल को लेकर सरकार एक नई रणनीति पर काम कर सकती है. अगर सरकार इस पर आगे बढ़ती है, तो इसे पहले राज्यसभा में पेश किया जा सकता है. राज्यसभा में सरकार के लिए जरूरी संख्या बल जुटाना लोकसभा के मुकाबले ज्यादा आसान माना जाता है. अगर ऐसा होता है तो विधायी प्रक्रिया थोड़ी सुगम हो जाएगी. इस पूरी रणनीति पर अंतिम फैसला जल्द ही सामने आने की संभावना है.
