बस्तर संभाग में सुरक्षा बलों को एंटी-नक्सल ऑपरेशन के दौरान नक्सलियों के गुप्त ठिकानों से 8 किलो सोना मिला है. बतया जा रहा है कि इस दौरान पुराने 500 और 1000 रूपये के नोटों के बंडल भी बरामद हुए हैं.
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर संभाग में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है. पुलिस के मुताबिक पिछले 2 सालों में नक्सलियों के गुप्त ठिकानों और अंडरग्राउंड डंप से लगभग 8 किलो सोना बरामद किया जा चुका है. इनमें बड़ी मात्रा में सोने के बिस्कुट शामिल हैं. बताया जा रहा है कि जंगलों में नक्सलियों ने हथियारों के साथ सोने को भी जमीन के नीचे छिपाकर रखा था.
जमीन के नीचे छिपाया सोना
पुलिस के मुताबिक बीजापुर के बासागुड़ा और कुटरू तथा दंतेवाड़ा के बारसूर जैसे इलाकों में नक्सलियों के कई ठिकानों से यह बरामदगी हुई है. सोने को प्लास्टिक के ड्रमों और बर्तनों में भरकर जमीन के नीचे छिपाया दिया गया था. कुछ डंप से आधुनिक हथियारों के साथ सोने के बिस्कुट भी मिलने की बात सामने आई है.
नगदी की जगह सोने पर भरोसा
आपको बता दें कि एंटी-नक्सल अभियानों की निगरानी कर रहे अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक विवेकानंद ने बताया कि नक्सलियों ने नोटबंदी के अनुभव से सबक लेते हुए अपनी बड़ी मात्रा में नकदी को सोने में बदलना शुरू किया था. उनका मानना था कि भविष्य में यदि इसी तरह का कोई आर्थिक संकट आता है तो नकदी के मुकाबले सोना ज्यादा सुरक्षित रहेगा. पुलिस का कहना है कि सोना ऐसी संपत्ति बन गया था, जिसे जरूरत पड़ने पर आसानी से नकदी में बदला जा सकता था.
पुराने 500-1000 के नोटों के बंडल बरामद
जानकारी के मुताबिक ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों को पुराने 500 और 1,000 रुपये के नोटों के बंडल भी मिले हैं. पुलिस ने बताया कि इससे संकेत मिलता है कि नक्सली नोटबंदी के दौरान अपने पास मौजूद पूरी नकदी को समय पर बदल नहीं पाए थे. जंगलों में बनाए गए कई डंप में हथियारों और दूसरे सामान के साथ सोना भी छिपाकर रखा गया था.
कैडरों को खर्च के लिए देते थे सोना
पुलिस के मुताबिक कुछ मौकों पर नक्सली अपने खास नेताओं या कैडरों को खर्च के लिए नकदी के बजाय सोने के बिस्कुट या सिक्के भी देते थे. हालांकि सभी डंप तक पहुंचना सुरक्षा एजेंसियों के लिए आसान नहीं है. बताया गया है कि कई गुप्त ठिकानों की जानकारी संगठन के चुनिंदा शीर्ष नेताओं तक ही सीमित थी.
पुराने कमांडरों की जानकारी जुटा रही पुलिस
आपको बता दें कि अब पुलिस आत्मसमर्पण कर चुके नक्सली कमांडरों और स्पेशल जोनल कमेटी के कैडरों की मदद से ऐसे पुराने ठिकानों की जानकारी जुटा रही है. इनमें पापा राव जैसे आत्मसमर्पित कैडरों से मिली जानकारी भी सुरक्षा बलों के लिए अहम मानी जा रही है.
