Nepal Flood Death Toll 2026: नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर फटने से 392 लोगों की मौत हो चुकी है और चीन ने अगले 72 घंटों में एक और बैरियर झील फटने की चेतावनी जारी कर हाई अलर्ट घोषित किया है.

Nepal Flood Death Toll 2026: नेपाल और तिब्बत सीमा पर बुधवार को आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है. तिब्बत सीमा से करीब 20 किलोमीटर ऊपर ग्लेशियर टूटने की वजह से भयंकर जलप्रलय आ गया. इस आपदा का असर नेपाल के रसुवा, धादिंग, नुवाकोट, गोरखा, तनहुं और चितवन समेत कई जिलों में देखने को मिला है. अब तक 392 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है. मलबे और पानी की तेज धार में बहकर आए शवों के कारण अस्पतालों में जगह कम पड़ गई है, जिसके चलते शवों को अस्थायी तंबुओं में रखा गया है. रॉयटर्स के अनुसार 1,500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिससे मौतों का आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है.
13 हजार से ज्यादा जवान राहत और बचाव कार्य में जुटे
बाढ़ ने नेपाल के बुनियादी ढांचे को बुरी तरह तबाह कर दिया है. 20 से अधिक मुख्य पुल और लगभग 40 किलोमीटर हाईवे पानी के तेज बहाव में बह गए हैं. रास्ते बंद होने की वजह से कई इलाकों का संपर्क पूरी तरह कट चुका है. नेपाल सरकार ने राहत कार्य के लिए 13,295 सुरक्षाकर्मियों को मैदान में उतारा है. इसके अलावा चीन ने भी अपने 141 बचाव कर्मियों और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के वेस्टर्न थिएटर कमांड की टीम को मौके पर भेजा है. काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, देश में करीब 550 विदेशी नागरिकों समेत कुल 910 लोग लापता हैं. भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिया गया है.
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 290 भारतीय लापता
इस भीषण त्रासदी में लापता विदेशी नागरिकों में सबसे बड़ी संख्या भारतीय नागरिकों की है. कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए भारत के 290 तीर्थयात्री अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश में बचाव दल दिन-रात जुटे हुए हैं. भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 54 भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है. बचाए गए लोगों में तमिलनाडु के 21 लोग और एक पावर प्रोजेक्ट के कर्मचारी शामिल हैं. अन्य देशों की बात करें तो अमेरिका के 65, यूक्रेन के 53, मलेशिया के 51 और ब्रिटेन के 33 नागरिक लापता हैं. स्थिति का जायजा लेने के लिए नेपाल और चीन के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी लगातार दौरा कर रहे हैं.
50 मीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से बहा पानी और मलबा
चीन के ग्यिरोंग बॉर्डर पोर्ट पर इस आपदा ने भारी तबाही मचाई है, जो चीन के बेल्ट एंड रोड नेटवर्क का एक अहम हिस्सा माना जाता है. चीनी भूविज्ञानी गुओ झाओचेंग के अनुसार, जब पानी और मलबे का सैलाब आया, तो उसकी रफ्तार करीब 50 मीटर प्रति सेकेंड दर्ज की गई. इतनी प्रचंड गति के कारण लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भागने का थोड़ा भी मौका नहीं मिला. देखते ही देखते 20 किलोमीटर से ज्यादा का दायरा मलबे से पट गया. नेपाल पुलिस के मुताबिक चितवन, नवलपरासी, धादिंग और गोरखा जैसे इलाकों से लगातार शवों को निकाला जा रहा है.
72 घंटे का रेड अलर्ट: फट सकती है एक और झील
तबाही के बीच चीन ने एक और भयानक प्राकृतिक आपदा को लेकर चेतावनी जारी की है. नेपाल सीमा के पास ग्यिरोंग से 18 किमी ऊपर नदियों के संगम पर मलबे के कारण एक अस्थाई बैरियर झील बन गई है. चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने अलर्ट जारी किया है कि अगले 72 घंटों में यह झील टूट सकती है. फिलहाल झील में 20 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा हो चुका है और इसमें 30 लाख क्यूबिक मीटर पानी और जुड़ने का अनुमान है. अगर यह प्राकृतिक बांध टूटता है, तो निचले इलाकों में दोबारा भयंकर प्रलय आ सकता है.
नेपाल में हाई अलर्ट, चीन के साथ कूटनीतिक बातचीत की मांग
झील फटने के खतरे को देखते हुए नेपाल के आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने भोटेकोशी नदी के आसपास के तमाम इलाकों में हाई अलर्ट जारी कर दिया है. लोगों को सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है. इस बीच नेपाल की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रबी लामिछाने ने सर्वदलीय बैठक बुलाई. बैठक में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने सीमा पार ग्लेशियर से जुड़े इन खतरों से निपटने के लिए चीन सरकार के साथ सीधे कूटनीतिक स्तर पर बात करने की सिफारिश की है. नेपाल अब एक मजबूत अर्ली वार्निंग और आपदा प्रबंधन सिस्टम बनाने पर जोर दे रहा है ताकि लोगों की जान बचाई जा सके.
