केंद्र सरकार ने सरकारी वाहनों के दुरूपयोग को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. दरअसल, सरकार ने ‘एक अधिकारी, एक सरकारी गाड़ी की पॉलिसी’ लागू की है. साथ ही इस नियम को बेहद ही सख्ती से लागू करने का फैसला लिया है. यह नया नियम वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग की तरफ से जारी किया गया है. नए कार्यालय ज्ञापन के मुताबिक अगर कोई अधिकारी एक से अधिक जिम्मेदारी को संभालता है, तो उसे दूसरी गाड़ी आवंटित नहीं की जाएगी.
पहले क्या था नियम
दरअसल, पहले बड़े या वरिष्ठ सरकारी अधिकारी को अगर अपने काम के अलावा कोई और एकस्ट्रा पद दिया जाता था, तो वह उस पद के लिए भी सरकार से गाड़ी ले सकता था. इसी कारण से एक अधिकारी के बाद 2 या 3 सरकारी गाड़ियां होती थी. एक से अधिक गाड़ी होने पर अधिकारी उसका यूज अपने पर्सनल काम के लिए भी कर लेते थे.
अब क्या है नियम
इन्हीं, दुरुपयोगों को रोकने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. अधिकारी अब केवल एक ही गाड़ी अपने पास में रख सकते हैं. पर्सनल या एकस्ट्रा काम के लिए वह गाड़ी अपने पास में नहीं रख सकते हैं. अधिकारी केवल कुछ ही काम के लिए अपने पास में इसे रख सकते हैं. वहीं, जो गाड़ियां सरकारी अफसरों के पास से वापस आ जाएगी. उन्हें सुरक्षित पुलिस कस्टडी में वापस से भेज दिया जाएगा.
क्यों लाया गया है नियम
सरकार ने इस नियम को लागू करने के पीछे का मुख्य मकसद भी बताया है. ऐसा करने सरकार टैक्सपेयर्स के पैसों की बर्बादी रोकना चाहती है. साथ ही सरकारी खर्च में कटौती भी हो पाएगी. पेट्रोल, डीजल का बेफजूल खर्च भी बच जाएगा.
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