OP Rajbhar: उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में राजभर ने मेरठ के मवाना में हुई एक घटना का जिक्र करते हुए सपा पर दलित और पिछड़े समाज के नेताओं का अपमान करने का आरोप लगाया.
राजभर ने दावा किया कि मेरठ के मवाना में आयोजित एक सपा कार्यक्रम में दलित समाज से आने वाले एक पूर्व मंत्री और गुर्जर समाज के जिलाध्यक्ष मंच पर मौजूद थे. इसी दौरान सपा के एक सेक्टर अध्यक्ष के पहुंचने पर विवाद की स्थिति बन गई और मंच पर बैठे नेताओं को उनकी “हैसियत” बताई गई.
सपा में यादव समाज के नेताओं का वर्चस्व
सुभासपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि सपा में यादव समाज के नेताओं का वर्चस्व है और अन्य जातियों के नेताओं को सम्मान नहीं मिलता। उन्होंने अपनी पोस्ट में सपा को “यादववादी पार्टी” बताते हुए कहा कि दलित और अति पिछड़ा समाज इस तरह के व्यवहार को नोट कर रहा है.
राजभर ने यह भी दावा किया कि समाजवादी पार्टी में अंदरूनी असंतोष बढ़ रहा है और आने वाले समय में पार्टी में और टूट देखने को मिल सकती है.उन्होंने कहा कि मुरादाबाद के बाद मेरठ में भी इसकी शुरुआत हो चुकी है.हालांकि, राजभर के आरोपों पर समाजवादी पार्टी की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा
”YP’ यानी ‘यादववादी पार्टी’ दलितों का अपमान कैसे करती है, इस घटना से समझिए।
मेरठ के मवाना में ‘राजा बाबू’ उर्फ अखिलेश यादव जी की पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने एक सभा बुलाई। मंच सजा था। माला था और माईक भी था। कुछ लोग भी थे।
दलित समाज से आने वाले पूर्व मंत्री, जो कि जाति से वाल्मीकि हैं, मंच की शोभा बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे तो उनके साथ गुर्जर समाज से आने वाले जिलाध्यक्ष भी उस शोभा का हिस्सा बनने के प्रयास में थे।
देशभक्ति और समाजवाद का गीत बज रहा था। पूरा माहौल आपसी ‘भाई और चारे’ का था।
अचानक से ‘YP’ यानी ‘यादववादी पार्टी’ के सेक्टर अध्यक्ष की दमदार एंट्री होती है, जो यादव है।
कार्यक्रम के माहौल के साथ मंच का गीत बदल जाता है। अखिलेश यादव जी की पार्टी का फेवरेट गीत- ‘भइया के आवे दे सत्ता में, कट्टा सटा के उठा लेंगे घारा से’ बजना शुरू हो जाता है।
और सेक्टर अध्यक्ष पूर्व मंत्री समेत जिलाध्यक्ष को उनकी हैसियत बताना शुरू कर देता है।
अखिलेश जी का सेक्टर अध्यक्ष कहता है- यादवों कि पार्टी का कार्यक्रम है, मंच पर तुम लोग कैसे बैठ गए?
तमतमाए सेक्टर अध्यक्ष के सामने सबकी हिम्मत जवाब दे जाती है। कईयों की घिग्घी बंध जाती है। सेक्टर अध्यक्ष के अखिलेश जी का स्वजातीय होने का डर मंच पर बैठे सभी लोगों के ख्याल में आ जाता है। कहीं भइया जी से कह दिया तो?
वहीं बेचारे दलित नेता अखिलेश जी के सेक्टर अध्यक्ष की गाली खाते-खाते पस्त हो जाते हैं।
वो बेचारे कर भी क्या कर सकते थे कुछ बोल देते तो उनके साथ PDA यानी ‘पीट देगा अहीर’ (सपाई) हो जाता। तो शांत रहे।
उत्तर प्रदेश का अति पिछड़ा और दलित समाज अखिलेश जी की पार्टी के एक-एक अपमान को नोट कर रहा है। देखते जाइए। समय आएगा।
सपा में टूट होगी और होकर रहेगी। मुरादाबाद के बाद मेरठ में भी टूट की शुरुआत हो चुकी है।
इंतजार करिए।
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