RBI warns parliamentary committee: आरबीआई ने संसदीय समिति के सामने क्रिप्टोकरेंसी को देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताते हुए इसे कानूनी मान्यता न देने की दोटूक बात कही है, जबकि आईसीएआई ने इस पर पूरी तरह बैन लगाने के बजाय एक स्पष्ट कानून बनाने का सुझाव दिया है.

RBI warns parliamentary committee: क्रिप्टोकरेंसी को लेकर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने एक बार फिर सरकार और देश को बड़े खतरे से आगाह किया है. आरबीआई ने संसद की एक खास कमेटी (संसदीय समिति) के सामने दोटूक शब्दों में कहा है कि क्रिप्टोकरेंसी भारत जैसी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए बहुत बड़ा खतरा है. केंद्रीय बैंक का मानना है कि फिलहाल देश में इसे किसी भी तरह की कानूनी मान्यता या मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए. अगर ऐसा किया गया, तो देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों को भारी नुकसान पहुंच सकता है.
बीजेपी सांसद भर्तृहरि महताब की अगुवाई वाली इस संसदीय समिति की बैठक में डिजिटल एसेट्स यानी क्रिप्टो के भविष्य को लेकर बड़ा मंथन हुआ. इस बैठक में आरबीआई के बड़े अधिकारियों के साथ साथ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (ICAI) के लोग भी शामिल हुए. आरबीआई के अफसरों ने समिति को समझाया कि क्रिप्टोकरेंसी का पूरा सिस्टम ऐसा है कि इस पर नजर रखना नामुमकिन के बराबर है. यही वजह है कि भारत जैसे विकासशील देश के लिए यह एक टाइम बम की तरह साबित हो सकता है.
रिजर्व बैंक ने इसके पीछे सबसे बड़ा कारण देश की सुरक्षा को बताया है. बैंक का कहना है कि क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ावा देने, ड्रग्स की तस्करी और दूसरे काले धंधों में धड़ल्ले से किया जा सकता है. चूंकि क्रिप्टो का लेन देन करने वाली ज्यादातर कंपनियां विदेशों से चलती हैं, इसलिए भारत की जांच एजेंसियों के लिए यह पता लगाना बहुत मुश्किल हो जाता है कि पैसा कहां से आ रहा है और किसके पास जा रहा है. इस वजह से ऐसे अवैध लेन देन पर लगाम लगाना आसान नहीं है.
बैठक खत्म होने के बाद समिति के अध्यक्ष भर्तृहरि महताब ने मीडिया से बात करते हुए साफ किया कि आरबीआई भारत में क्रिप्टो को कानूनी दर्जा देने के सख्त खिलाफ है. उन्होंने यह भी जानकारी दी कि उनकी समिति इस बात पर भी विचार कर रही है कि इनकम टैक्स कानून के तहत इन डिजिटल एसेट्स पर कैसे नियम बनाए जाएं. सरकार की कोशिश है कि इस पर पूरी तरह नजर रखी जा सके ताकि देश के टैक्स सिस्टम को कोई चूना न लगा पाए.
दूसरी तरफ, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (ICAI) ने इस मामले पर थोड़ा अलग सुझाव दिया है. संस्थान का कहना है कि क्रिप्टो पर पूरी तरह बैन लगाने के बजाय सरकार को इसके लिए एक मजबूत और साफ सुथरा कानून बनाना चाहिए. आईसीएआई ने समिति को भरोसा दिलाया कि वे सरकार के लिए ऐसा नियम कानून तैयार करने में मदद कर सकते हैं, जिससे आम निवेशकों का पैसा भी सुरक्षित रहे और सारी चीजें बिल्कुल साफ हों. हालांकि, अंतिम फैसला सरकार को ही लेना है कि वह आरबीआई की चेतावनी को मानती है या नया कानून लाती है.
