Maharashtra schools rte fees: महाराष्ट्र के स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने विधानसभा में स्वीकार किया कि आरटीई के तहत प्राइवेट स्कूलों का लगभग 3,000 करोड़ रुपये का बकाया का दावा काफी हद तक सही है और सरकार वित्त विभाग से अतिरिक्त बजट मांगकर इसे चुकाने की प्रक्रिया में है.

Maharashtra schools rte fees: महाराष्ट्र के सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के बीच पैसों को लेकर चल रही खींचतान अब विधानसभा तक पहुंच गई है. मामला शिक्षा का अधिकार यानी आरटीई (RTE) के तहत मिलने वाले फंड से जुड़ा हुआ है. विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान यह बात सामने आई कि सरकार पर प्राइवेट स्कूलों का करीब 3,000 करोड़ रुपये बकाया है. इस बात को लेकर जब सदन में सवाल उठे, तो राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने खुद माना कि स्कूलों का यह दावा काफी हद तक सच है.
यह पूरा मुद्दा शिवसेना (यूबीटी) के नेता अनिल परब ने विधान परिषद में उठाया था. उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि राज्य के 8,000 से ज्यादा प्राइवेट स्कूल आरटीई के तहत गरीब बच्चों को दाखिला देते हैं. इन बच्चों की फीस का पैसा सरकार को वापस करना होता है. लेकिन सरकार ने लंबे समय से स्कूलों को यह पैसा नहीं दिया है, जिससे अब स्कूलों के सामने अपना खर्च चलाने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है.
इस सवाल का जवाब देते हुए शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने लिखित में अपनी बात रखी. उन्होंने साफ कहा कि सरकार को कई स्कूल मैनेजमेंट और अलग अलग संगठनों से फीस का पैसा न मिलने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं. उन्होंने माना कि जो 3,000 करोड़ के बकाए की बात कही जा रही है, वह आंशिक रूप से सही है. हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि साल 2012 से लेकर 2026 के बीच सरकार ने स्कूलों को 2,027 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया भी है.
शिक्षा मंत्री ने सदन में यह भी बताया कि ‘समर्थन’ नाम के एक स्कूल संगठन ने सरकार को सीधे चेतावनी दे डाली है. संगठन का कहना है कि अगर सरकार ने जल्द ही उनका पूरा बकाया पैसा नहीं चुकाया, तो अगले साल से प्राइवेट स्कूल आरटीई के तहत होने वाले एडमिशन की प्रक्रिया को बहुत कठिन बना देंगे. अगर ऐसा हुआ, तो आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब परिवार के बच्चों को अच्छे स्कूलों में एडमिशन मिलने में भारी दिक्कत आएगी.
हालांकि, शिक्षा मंत्री दादा भुसे ने इस बात से साफ इनकार किया कि सरकार जानबूझकर पैसों को रोक कर बैठी है. उन्होंने कहा कि कागजी और वित्तीय प्रक्रियाओं की वजह से थोड़ा समय लग रहा है. सरकार ने अब इस समस्या को सुलझाने के लिए वित्त विभाग से अतिरिक्त बजट यानी और पैसों की मांग की है. जैसे ही वहां से मंजूरी मिलेगी, स्कूलों का बकाया पैसा चुकाने की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा ताकि बच्चों की पढ़ाई पर कोई असर न पड़े.
