Stock Market Crash: कच्चे तेल के दामों में भारी उछाल और अमेरिका-ईरान तनाव के कारण भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई. निवेशकों को ₹7.6 लाख करोड़ का नुकसान हुआ.

Stock Market Crash: सप्ताह के पहले ही दिन शेयर बाजार में हाहाकार मच गया. बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट दर्ज की गई. इस बिकवाली से निवेशकों को कुछ ही मिनटों में ₹7.6 लाख करोड़ से ज्यादा का भारी नुकसान हुआ. HDFC Bank, Reliance और ICICI Bank जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर धड़ाम हो गए. सेंसेक्स 1040 अंक टूटकर 72,854 पर आ गया, जबकि निफ्टी 330 अंक गिरकर 22,807 के स्तर पर पहुंच गया. बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर ₹4,75,64,385 करोड़ रह गया.
कच्चे तेल में लगी आग से बिगड़ा माहौल
बाजार में आई इस तबाही का सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई अचानक तेजी है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड उछलकर 107 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल का महंगा होना देश के लिए बड़ा झटका है. इससे देश का आयात बिल बढ़ेगा और महंगाई में भारी बढ़ोतरी की आशंका गहरा गई है. तेल महंगा होने से ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ती है, जिससे रोजमर्रा की चीजें महंगी होने लगती हैं. इसी डर से निवेशकों ने तुरंत बिकवाली शुरू कर दी.
ट्रंप के फैसले और ईरान तनाव का असर
कच्चे तेल में उबाले के पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव मुख्य वजह है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के शांति प्रस्ताव को खारिज करने से तनाव और बढ़ गया है. इससे होर्मुज स्ट्रेट खुलने और पश्चिम एशिया में शांति बहाल होने की उम्मीदों को झटका लगा है. इस फैसले के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय सप्लाई बाधित होने के डर से कच्चे तेल के दाम आसमान छूने लगे. वैश्विक अनिश्चितता के कारण शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा डगमगा गया.
इंडिया वीआईएक्स और रुपये की गिरावट
बाजार में डर को मापने वाला सूचकांक ‘India VIX’ अचानक 14.50 फीसदी उछलकर 14.14 के स्तर पर पहुंच गया. यह उछाल आने वाले दिनों में और ज्यादा उतार-चढ़ाव का संकेत दे रहा है. इसके साथ ही भारतीय रुपये में डॉलर के मुकाबले 20 पैसे की गिरावट आई और यह 95.95 के स्तर पर आ गया. रुपये के कमजोर होने से विदेशी वस्तुओं का आयात और महंगा हो जाता है, जिससे भारतीय कंपनियों के मार्जिन पर बुरा असर पड़ता है.
एफआईआई की बिकवाली और एशियाई बाजार का दबाव
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बाजार से भारी मात्रा में पैसा निकालना शुरू कर दिया है. पिछले कारोबारी सत्र में एफआईआई ने ₹3,700 करोड़ से ज्यादा की बिकवाली की थी. इसके अलावा पूरे एशियाई बाजार में मंदी का माहौल रहा. दक्षिण कोरिया का ‘KOSPI’ 2 फीसदी और जापान का ‘Nikkei’ भारी गिरावट के साथ कारोबार कर रहा था. Gift Nifty में 350 अंकों की गिरावट ने भारतीय बाजार के लिए पहले ही नकारात्मक संकेत दे दिए थे.
निवेशकों के लिए आगे का रास्ता
वैश्विक अनिश्चितता और कच्चे तेल के बढ़ते दामों के बीच बाजार में अभी और अस्थिरता बनी रह सकती है. जब तक अमेरिका और ईरान के बीच स्थितियां सामान्य नहीं होतीं, तब तक दबाव बना रहेगा. जानकारों का मानना है कि ऐसे माहौल में छोटे निवेशकों को हड़बड़ी में फैसले लेने से बचना चाहिए. केवल मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में ही लंबी अवधि का नजरिया रखकर निवेश करना समझदारी होगी.
