strait of hormuz crisis: मध्य पूर्व में तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल सप्लाई बाधित होने के बाद भारत ने रूस से तेल आयात बढ़ाकर दोगुना (22.5 लाख बैरल प्रतिदिन) कर दिया है. ट्रंप प्रशासन द्वारा रूसी तेल खरीद पर दी गई छूट के विस्तार से भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने और इराक-यूएई से कम हुई सप्लाई की भरपाई करने में बड़ी मदद मिली है.

strait of hormuz crisis: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब दुनिया की तेल सप्लाई पर साफ दिखने लगा है. Strait of Hormuz के रास्ते तेल की आवाजाही लगभग रुक गई है. यह स्थिति तब बनी जब Iran के खिलाफ United States और Israel के बीच टकराव बढ़ गया. इस रास्ते से आम तौर पर दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का तेल गुजरता है. सप्लाई रुकने का असर भारत पर भी पड़ा है. आंकड़ों के अनुसार मार्च में भारत का कच्चे तेल का आयात फरवरी की तुलना में करीब 13 प्रतिशत कम हो गया.
हालांकि इस संकट के बीच Russia भारत के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आया. जब मध्य पूर्व से तेल की सप्लाई कम होने लगी, तब रूस ने भारत को ज्यादा तेल भेजना शुरू कर दिया. आंकड़ों के मुताबिक मार्च में भारत ने रोजाना लगभग 45 लाख बैरल कच्चा तेल आयात किया. इसमें से करीब आधा तेल रूस से आया. रूस से आयात बढ़कर करीब 22.5 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया. यानी फरवरी की तुलना में यह लगभग दोगुना हो गया.
दूसरी ओर मध्य पूर्व से आने वाला तेल तेजी से घट गया. मार्च में इस क्षेत्र से भारत को केवल 11.8 लाख बैरल प्रतिदिन तेल मिला. यह पहले के मुकाबले करीब 61 प्रतिशत कम है. इस गिरावट का असर खास तौर पर Iraq और United Arab Emirates से आने वाली सप्लाई पर पड़ा. दोनों देशों से भारत को मिलने वाला तेल कई सालों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. इसके कारण भारत के कुल आयात में मध्य पूर्वी तेल की हिस्सेदारी घटकर लगभग 26.3 प्रतिशत रह गई.
तेल की कमी को पूरा करने के लिए भारतीय रिफाइनरियों ने दूसरे देशों की ओर रुख किया. रूस के अलावा Angola जैसे अफ्रीकी देश से भी तेल खरीद बढ़ाई गई. मार्च में रूस भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना रहा. इसके बाद Saudi Arabia दूसरे स्थान पर रहा. जबकि अंगोला तीसरे नंबर पर पहुंच गया. इसके बाद यूएई और इराक का स्थान रहा. मध्य पूर्व से कम सप्लाई के कारण भारत के कुल आयात में OPEC देशों की हिस्सेदारी घटकर करीब 29 प्रतिशत रह गई, जो अब तक का सबसे कम स्तर माना जा रहा है.
इस बीच अमेरिकी सरकार ने भी एक अहम फैसला लिया है. Donald Trump के प्रशासन ने रूसी तेल खरीद पर लगी छूट को एक महीने के लिए बढ़ा दिया है. इससे कई देशों को समुद्र में उपलब्ध रूसी तेल खरीदने की अनुमति मिल गई है. भारत उन देशों में शामिल है जिन्हें इसका फायदा मिल रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से भारत को बड़ी राहत मिली है. आने वाले समय में रूस से तेल आयात और बढ़ सकता है, जिससे भारत की ऊर्जा जरूरतें पूरी करने में मदद मिलेगी.
